बिहार में एक दिन का थानेदार

जन थानेदार
Image caption एक दिन के थानेदार को अपने इलाक़े में गश्त करने और एफ़आईआर दर्ज करने जैसे सीमित अधिकार दिए जाते हैं

कहते हैं वर्दी का रोब ही कुछ और होता है, चाहे वर्दी वाला एक आम सिपाही ही क्यों न हो. अगर यह वर्दी वाला एक थानेदार हो तो फिर क्या कहने.

वर्दी के इसी आकर्षण ने बिहार के जमुई ज़िले के कुछ लोगों को अपना मुरीद बना दिया है और वे बारी-बारी से एक दिन के लिए थानेदार बन रहे हैं.

ऐसे लोगों के लिए सोने पे सुहागा यह है कि इसके लिए उनके पास किसी शैक्षणिक डिग्री या प्रमाणपत्र की ज़रूरत भी नहीं है.

काफ़ी लोग एक दिन के लिए थानेदार बनने के लिए आवेदन भी कर रहे हैं. पुलिस की भाषा में इस पद को 'थाना जनाध्यक्ष' भी कहा जा रहा है.

पुलिस का मानना है कि आम लोगों को एक दिन के लिए ही सही, इस तरह की ज़िम्मेदारी सौंप देने से उन्हें पुलिस के काम करने के तौर-तरीक़ों ओर काम के दबाव का सही अंदाज़ा मिल सकेगा.

जमुई के पुलिस अधीक्षक राकेश राठी कहते हैं, “पुलिस के प्रति आमतौर पर लोगों में विश्वास की कमी होती है जिसके चलते उनके बीच दोस्ताना संबंध भी आसानी से नहीं बन पाते. इसलिए हमने यह प्रयोग शुरू किया है. उम्मीद है कि हमारी इस पहल से पुलिस-पब्लिक रिश्तों में आपसी विश्वास और दोस्ताना भाव विकसित होंगे.”

जमुई झारखंड सीमा पर स्थित एक ऐसा ज़िला है जहाँ नक्सलियों का खासा प्रभाव है और वहाँ समय-समय पर नक्सली वारदातें होती रहती हैं.

इस क्षेत्र की पुलिस को दोहरी चुनौती का समाना करना पड़ता है. एक तरफ़ जहाँ नक्सलियों से निपटना होता है तो वहीं उसके लिए आम लोगों के विश्वास भी बनाए रखने की चुनौती भी होती है.

जवाबदह बनाने का नुस्ख़ा

जमुई के सिकंदरा गाँव के अरविंद कुमार कहते हैं, “इस तरह के अवसर का हमें अवश्य लाभ उठाना चाहिए, क्योंकि इससे हमें पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी होगी, जिससे पुलिस की मदद करने में आसानी होगी."

अरविंद कहते हैं, “पुलिस चूंकि हमारी सुरक्षा करती है इसलिए हमारी भी ज़िम्मेदारी है कि हम उसकी सहायता करें. हमें लगता है कि इस तरह की पहल से निश्चित रूप से पुलिस-पब्लिक रिश्ते को मज़बूत और विश्वसनीय बनाया जा सकता है. "

पर, सवाल यह है कि क्या पुलिस मैनुअल एक आम आदमी को इस तरह क़ानूनी शक्ति देने की अनुमति देता है?

पुलिस अधीक्षक राकेश राठी कहते हैं, “हम आम आदमी को थानेदार को मिलने वाले पूर्ण अधिकार नहीं दे सकते. इसलिए एक दिन के थानेदार को नए आदेश पारित करने और अनुसंधान करने की ज़िम्मेदारी नहीं दी जाती. हाँ, वह किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज कर सकते हैं और क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने निर्धारित क्षेत्र में गश्त कर सकते हैं. "

प्रेम कुमार पासवान स्थानीय मलयपुर थाना के निवासी हैं और वह एक दिन के थानेदार की हैसियत से पुलिस बल के साथ गश्त पर निकले थे.

वह कहते हैं, “यह एक शानदार प्रयास है हम लोगों में जाकर यह बताना चाहते हैं कि पुलिस भी उनके ही समाज का हिस्सा है और वह उनकी सुरक्षा के लिए है. इसलिए पुलिस पर विश्वास करने से जहाँ उनकी सुरक्षा अच्छे तरीक़े से हो सकेगी वहीं आम लोगों के सहयोग से पुलिस को अपना काम करने में आसानी होगी.”

मलयपुर के थानाध्यक्ष रामअवतार पासवान कहते हैं, “हमारा प्रयास काफी कामयाब दिख रहा है. हम अगले तीस दिनों तक इस अभियान को चलाना चाहते हैं लेकिन आवेदनों की संख्या को देखते हुए ऐसा लगता है कि हमें इसे आगे भी जारी रखना पड़ सकता है. हमें 40 से अधिक युवाओं ने आवेदन दे रखे हैं.”

प्रेम कुमार कहते हैं कि पुलिस प्रशासन को इस पद को स्थाई बना देना चाहिए ताकि जहाँ लोगों को थानों में प्रतिनिधित्व करने वाले अपने लोग मिल जाएंगे वहीं स्थानीय थाने को एक स्थाई सहयोगी भी मिल जाएगा.

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