ब्रिटेन ने भारतीय छात्रों के लिए वीज़ा बंद किया

उत्तर भारत से बड़ी संख्या में ब्रिटिश वीज़ा के आवेदन आ रहे हैं

ब्रिटेन ने उत्तर भारत के दिल्ली, चंडीगढ़ और जालंधर केंद्रों से विद्यार्थी वीज़ा आवेदन लेना अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया है.

बड़ी संख्या में वीज़ा आवेदनों के कारण ये क़दम उठाया गया है.

इसके अलावा नेपाल और बांग्लादेश से भी वीज़ा आवेदन न लेना का फ़ैसला किया गया है.

ब्रिटिश अधिकारियों का कहना है कि पिछले तीन महीनों में उत्तर भारत से 13 हज़ार 500 विद्यार्थी वीज़ा के आवेदन आए जबकि एक साल पहले इसी अवधि में दो हज़ार से कम आवेदन आए थे.

अधिकारियों का कहना है कि पूरी व्यवस्था इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों से भर गई है और इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि इसमें से कितने असली है.

दिल्ली स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ब्रिटेन में प्रवेश के लिए छात्र वीज़ा का इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है.

भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त सर रिचर्ज स्टेग का कहना है कि वीज़ा प्रणाली के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी.

उनका कहना था कि कुछ और जाँच की व्यवस्था की जाएगी और तब तक अस्थाई रूप से वीज़ा आवेदन लेना स्थगित कर दिया गया है.

फ़रवरी में समीक्षा

इस फ़ैसले की फ़रवरी के अंत में समीक्षा की जाएगी.

वीज़ा प्रणाली के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी.

सर रिचर्ड स्टेग, ब्रिटेन के उच्चायुक्त

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन भारत में सबसे बड़ी वीज़ा व्यवस्था चलाता है.

हर साल लगभग पाँच लाख से ज्यादा लोग ब्रिटेन की यात्रा करते हैं जिसमें हज़ारों विद्यार्थी होते हैं.

दरअसल ब्रिटेन की नई वीज़ा प्रणाली के लागू होने के बाद से भारत और बांग्लादेश से ब्रिटेन आने वाले छात्रों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है.

ब्रिटेन का वीज़ा प्राप्त करने के इच्छुक लोगों के लिए पिछले वर्ष एक अंक आधारित आप्रवासन प्रणाली लागू की गई थी जो अधिक कड़ी और चयनात्मक समझी जा रही थी.

लेकिन ब्रिटेन के आप्रवासन अधिकारियों ने कुछ समय पहले पाया कि इस प्रणाली के अधीन बनावटी छात्र और ज़्यादा आ रहे हैं.

ऐसा पाया गया है कि ऐसे बहुत से लोग छात्र वीज़ा पर आए हैं जिन्हें इससे पहले वीज़ा नहीं मिला था.

आप्रवासन अधिकारियों को लगता है कि बहुत से लोग पढ़ने की बजाए ब्रिटेन काम करने आ रहे हैं.

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