बच्चे की मौत को लेकर घाटी बंद

शोक और विरोध प्रदर्शन
Image caption सोमवार को वामिक़ फ़ारूक़ के शव को श्रीनगर में जगह-जगह ले जाया गया

पुलिस के साथ हुई झड़प में एक बच्चे की मौत के विरोध में आयोजित बंद से भारत प्रशासित कश्मीर में जनजीवन प्रभावित हुआ है.

रविवार को प्रदर्शनकारियों की एक भीड़ को जब पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े तो एक गोला सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले वामिक़ फ़ारूक़ के सिर पर जा लगा था. जिससे उसकी मौत हो गई थी.

सोमवार को भी इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे और पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई थीं.

बंद का आयोजन ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेस के दो धड़ों ने किया है.

बंद की वजह से घाटी में दुकानें बंद हैं और यातायात रोक दिया गया है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आँसू गैस का गोला दागने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि उस पुलिसकर्मी ने आँसू गैस के गोले छोड़ते समय आवश्यक सावधानी नहीं बरती जबकि स्थानीय निवासियों का कहना है कि मारा गया बच्चा वामिक फ़ारूक़ प्रदर्शनकारियों के बीच था ही नहीं, वह तो क्रिकेट खेलने गया हुआ था.

जन सुरक्षा क़ानून का विवाद

Image caption श्रीनगर में पथराव विरोध प्रदर्शन का बड़ा हथियार बना हुआ है

श्रीनगर में पिछले एक साल से हर हफ़्ते या दो हफ़्तों में पुलिस और भारत विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हो रही हैं. पहले प्रदर्शनकारी पत्थरबाज़ी करते हैं और फिर पुलिस उन पर आँसूगैस के गोले छो़डती है.

उनका कहना है कि पुलिस ने पत्थरबाज़ी करनेवाले युवकों की एक सूची बनाई है और उनको पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है. लेकिन प्रदर्शन फिर भी जारी हैं.

वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस पत्थर फ़ेंकने वाले बच्चों पर भी जन सुरक्षा क़ानून लागू कर रही है.

उनका कहना है कि पत्थरबाज़ी ऐसा छोटा अपराध है जिसकी वजह से किसी पर जन सुरक्षा क़ानून नहीं लगाया जा सकता.

पिछले वर्ष पुलिस ने इस क़ानून के तहत14 वर्ष के एक बच्चे को हिरासत में ले लिया था.

ये क़ानून सुरक्षाबलों को किसी व्यक्ति को बिना किसी सुनवाई के दो साल तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है.

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