तेलंगाना पर केंद्र ने बनाई समिति

आंदोलन करते तेलंगाना समर्थक
Image caption तेलंगाना राज्य के समर्थन और विरोध दोनों में आंदोलन हुए हैं

केंद्र सरकार ने तेलंगाना मसले पर विचार करने के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है.

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज बीएन श्रीकृष्णा इस समिति के अध्यक्ष होंगे.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक़ ये समिति आंध्र प्रदेश के लोगों और विभिन्न राजनीतिक दलों से विस्तृत विचार-विमर्श करेगी.

तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देने के लिए आंदोलन चला रही ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने कहा है कि यदि यह समिति राज्य के गठन के लिए रोड मैप पर काम करती है तो वह इसका स्वागत करेगी लेकिन अगर यह राज्य के गठन पर नए सिरे से विचार करती है तो यह उसे मंज़ूर नहीं.

बुधवार की शाम कमेटी की बैठक भी बुलाई गई है.

संयोगवश जिस दिन राज्य ने समिति के गठन की घोषणा की है, राज्य के समर्थकों ने तेलंगाना के इलाक़े में 500 किलोमीटर लंबी एक मानव श्रृंखला बनाई है.

समिति

पाँच जनवरी को दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्रालय ने आंध्र प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाई थी.

इसी बैठक में राज्य के गठन के मामले में और विचार विमर्श की ज़रुरत को देखते हुए एक समिति के गठन की घोषणा की गई थी.

बुधवार को घोषित समिति में जो अन्य सदस्य होंगे उनमें दिल्ली स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर रणबीर सिंह, इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीनियर रिसर्च फेलो डॉक्टर अबुसालेह शरीफ़, आईआईटी दिल्ली के मानविकी और समाजिक विज्ञान विभाग की प्रोफेसर रविंदर कौर और पूर्व गृह सचिव वीके दुग्गल हैं.

वीके दुग्गल इस समिति के सदस्य सचिव के रूप में भी काम करेंगे.

यह समिति तेलंगाना मसले पर किन-किन बिंदुओं का अध्ययन करेगी और इसकी अधिकारिता क्या होगी, इस बारे में पूरी जानकारी मिलनी बाकी है.

सशर्त स्वागत

Image caption पिछले महीनों में कई बार आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया है

बीबीसी के हैदराबाद संवाददाता उमर फारुख़ के मुताबिक़ अलग तेलंगाना राज्य बनाने की मांग कर रही संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक कोडंडा राम ने कहा है ''केंद्र सरकार ने अगर इस समिति का गठन तेलंगाना राज्य के निर्माण के लिए रोड मैप बनाने के लिए किया है तो हम इसका स्वागत करते हैं. लेकिन अगर ये समिति भी दूसरी समितियों की तरह सभी दलों और राज्य के लोगों से दोबारा बातचीत करने के लिए बनाई गई है तो हम इसका विरोध करेंगे.''

तेलंगाना राज्य की मांग कर रहे तेलंगाना क्षेत्र के टीडीपी, बीजेपी और तेलंगाना राष्ट्र समिति के जनप्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वही दोहराया जो जेएसी ने कहा है.

अलग तेलंगाना राज्य की मांग आधी सदी से की जा रही है, लेकिन वर्ष 2000 के बाद इस मांग में तेज़ी आई.

नवंबर 2009 में तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव ने अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर आमरण अनशन किया और 9 दिसंबर 2009 को उन्होंने ग्यारह दिन बाद अनशन तभी खत्म किया जब केंद्र सरकार ने अलग तेलंगाना राज्य के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने घोषणा की.

लेकिन इसके बाद तेलंगाना राज्य का विरोध शुरू हो गया और केंद्र ने अपना रुख़ बदलते हुए सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति की बात शुरू कर दी.

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