चर्च ऑफ़ इंग्लैंड ने पल्ला झाड़ा

खान

उड़ीसा में व्यापक तौर पर खनन कार्य जारी है

चर्च ऑफ़ इंग्लैंड ने कहा है कि वो भारत के उड़ीसा राज्य में खनन कर रही एक विवादित कम्पनी से अपने निवेश वापस लेगा.

शुक्रवार को जारी कियी गए एक बयान में चर्च ने कहा कि वो खनन कंपनी वेदांत से असंतुष्ट है क्योंकि उसने मानवाधिकारों के प्रति पर्याप्त सम्मान नहीं दिखाया है.

उड़ीसा राज्य में जारी खनन कार्य को लेकर अभियान चलाने वालों ने कहा है कि इस खनन के चलते इलाके के मूल निवासियों का अस्तित्व खतरे में है.

हालांकि वेदांत ने चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के इस फैसले पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन वो इस परियोजना का पहले से समर्थन करती रही है.

उड़ीसा राज्य के लंजीगढ़ इलाके में एलुमिनियम की फैक्टरी चला रही वेदांत कम्पनी में चर्च ऑफ़ इंग्लैंड ने करीब 40 लाख डॉलर के निवेश किए हैं .वेदांत इसी इलाके की निएमगिरी पहाड़ियों में एक बॉक्साईट खान चलाने की रूपरेखा तैयार कर रही है.

चर्च ऑफ़ इंग्लैंड की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है की चर्च वेदांत कम्पनी में अपना निवेश बरकरार रखने के लिए अपनी निवेश नीति की नैतिकता के साथ समझौता नहीं करेगा.

चर्च की नैतिक निवेश सलाहकार समीति के अध्यक्ष जॉन रेनोल्ड्स ने कहा, "छह महीने की साझेदारी के बाद हम इस बात से संतुष्ट नहीं है की वेदातं ने मानवाधिकारों और स्थानीय समुदाय के प्रति पर्याप्त सम्मान दिखाया है या फिर भविष्य में दिखाएगी. हमारी चिंता ये है की ब्रिटेन में पंजीकृत किसी भी कम्पनी को वहां के पर्यावरण, सामाजिक और शासन प्रणाली के कायदे कानूनों का सम्मान करना चाहिए."

चर्च के इस बयान में ये भी कहा गया है की वो इस बात को 'समझते' हैं कि भारत सरकार अभी भी इस नई खनन परियोजना को हरी झंडी देने के बारे में सोच विचार कर रही है.

चर्च के वेदांत कंपनी में से अपने निवेश वापस लेने के इस फैसले का सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने स्वागत किया है.

हालांकि चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के इस फैसले पर टिपण्णी करने के लिए वेदातं की तरफ से कोई भी आगे नहीं आया है लेकिन पिछले साल कंपनी ने इस खनन परियोजना में उड़ीसा सरकार और भारतीय न्याय पालिका के समर्थन की बात कही थी.

कम्पनी का कहना था की उसने परियोजना शुरू करने से पहले इससे होने वाले पर्यावरण सम्बन्धी और सामाजिक प्रभावों का व्यापक अध्ययन भी कर लिया था.

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