जलवायु पैनल पर 'पिघले' मनमोहन

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह ने आईपीसीसी को समर्थन देते रहने की बात कही.

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के पैनल (आईपीसीसी) की अहम भूमिका है और भारत को इसमें पूरा भरोसा है.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में आईपीसीसी की मुख्य रिपोर्ट में एक भारी चूक हुई थी लेकिन इससे ग्लोबल वॉर्मिंग का विज्ञान नहीं बदलेगा.

आईपीसीसी की उस रिपोर्ट में ये कहा गया था कि वर्ष 2035 तक हिमालय के ग्लेशियर पूरी तरह पिघल सकते हैं, हालाँकि बाद में इसे ग़लत पाया गया और रिपोर्ट में बदलाव किया गया.

इस चूक को लेकर आईपीसीसी के चेयरमैन राजेंद्र पचौरी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई और पश्चिमी देशों के कुछ अख़बारों ने इसके लिए राजेंद्र पचौरी को ही ज़िम्मेदार ठहराया था.

लेकिन मनमोहन सिंह ने इस रिपोर्ट का समर्थन करते हुए कहा, "यह विवाद आईपीसीसी के मुख्य आकलन को चुनौती नहीं देता जिसके मुताबिक़ ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तापमान, बारिश और समुद्र के जलस्तर पर असर डालेगा."

उनका कहना है, "मैं फिर ये कहता हूँ कि भारत को आईपीसीसी के कामकाज और उसके नेतृत्व में पूरा भरोसा है. भारत पूरी तरह आईपीसीसी का समर्थन करता है."

पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने भी कहा कि भारत राजेंद्र पचौरी का पूरा समर्थन करता है. हालाँकि वह इससे पहले आईपीसीसी रिपोर्ट पर सवाल उठा चुके हैं.

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