तेलंगाना: फिर आंदोलन की तैयारी

तेलंगाना के लिए आंदोलन (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption तेलंगाना राज्य के पक्ष और विपक्ष दोनों में आंदोलन हो चुके हैं

आंध्र प्रदेश में तेलंगाना के गठन को लेकर बनी श्रीकृष्णा समिति के कामकाज के दायरे से नाराज़ राजनीतिक दल और संगठन एक बार फिर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं.

उस्मानिया विश्वविद्यालय में छात्रों के संयुक्त संघर्ष समिति ने जहाँ शुक्रवार को बंद का आह्वान किया है.

वहीं तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) ने घोषणा की है कि उसके सभी दस विधायक शनिवार को सुबह विधानसभा अध्यक्ष से मिलेंगे और अनुरोध करेंगे कि उनका इस्तीफ़ा तत्काल स्वीकार कर लिया जाए.

प्रजा राज्यम पार्टी के एक विधायक महेश्वर रेड्डी ने भी इस्तीफ़ा सौंप दिया है.

टीआरएस ने कहा है कि वह तेलंगाना क्षेत्र से चुनकर आने वाले सभी दलों के जनप्रतिनिधियों पर इस्तीफ़ा देने के लिए दबाव बनाएगी.

इस बीच तेलंगाना पर गठित संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक भी शनिवार की सुबह बुलाई गई है जिसमें आगे की रणनीति पर फ़ैसला किया जाएगा.

माना जा रहा है कि तेलंगाना के लिए संघर्ष से जुड़े लोगों का मानना है कि दबाव बनाने के लिए 15 फ़रवरी से बजट सत्र शुरु होने से पहले सरकार को संकट में डालना आवश्यक है.

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ही समिति के कामकाज के दायरे की घोषणा की है.

इसके अनुसार पाँच सदस्यों वाली इस समिति से कहा गया है कि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग के साथ-साथ संयुक्त आंध्र प्रदेश की मांग का भी जायज़ा ले और दोनों ही मांगों पर सभी राजनैतिक दलों और अन्य संगठनों से बातचीत करे.

समिति को काम पूरा करने के लिए 31 दिसंबर, 2010 तक का समय दिया गया है.

नाराज़गी

Image caption चंद्रशेखर राव के लंबे अनशन के बाद केंद्र सरकार ने राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा की लेकिन बाद में पीछे हट गई

अलग राज्य का आंदोलन चलने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने श्रीकृष्णा समिति के कामकाज के दायरे पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा है कि यह तेलंगाना की जनता को धोखा देने की एक और कोशिश है.

कांग्रेस के सांसदों के फ़ोरम के संयोजक पोन्नम प्रभाकर ने भी समिति के कामकाज के दायरे की आलोचना की है और कहा है कि आंध्र क्षेत्र के लोगों की राय लेने की कोई आवश्कता ही नहीं है क्योंकि वो पहले ही यह कह चुके हैं कि वो संयुक्त आंध्र प्रदेश चाहते हैं जब कि तेलंगाना के लोग अलग राज्य चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्णा समिति से यह कहना ठीक नहीं है कि वो राज्य विभिन्न क्षेत्रों में हुए विकास का भी आकलन करे.

हालांकि इस मामले में अभी प्रमुख विपक्षी दल तेलगु देशम पार्टी अभी विभाजित है.

एक पक्ष तो समिति के कामकाज के दायरे से नाराज़ है जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि यह समय तेलंगाना पर रायशुमारी के लिए ठीक नहीं है क्योंकि लोग अभी भावनाओं में बहकर राय देंगे.

कामकाज का दायरा

भारत सरकार ने पृथक तेलंगाना राज्य के मुद्दे का समाधान ढूंढने के लिए तीन फ़रवरी को गठित न्यायधीश बीएन श्रीकृष्णा समिति के कामकाज का दायरा और शर्तें निर्धारित कर दी हैं.

Image caption आंदोलन के दौरान हिंसा की घटनाएँ हो चुकी हैं

समिति को कहा गया है कि वह आंध्र प्रदेश में पृथक राज्य को लेकर समर्थन के अलावा संयुक्त आंध्र प्रदेश की मांग पर भी लोगों की राय जाने.

इसके तहत समिति पृथक तेलंगाना राज्य की मांग और आंध्र प्रदेश को अविभाजित रखने की मांग को लेकर आंध्र प्रदेश की स्थिति का आकलन करेगी.

साथ ही समित यह भी देखेगी कि आंध्र प्रदेश राज्य के गठन के बाद से वहां कितनी तरक्की हुई है और उसका क्षेत्र के विभिन्न इलाक़ों पर कितना असर पड़ा है. इस असर को समझने के लिए समिति राज्य के समाज के विभिन्न तबकों, महिलाओं बच्चों, छात्रों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ा वर्ग के लोगों से बात करेगी.

इसी संदर्भ में समिति उन समस्याओं की निशानदेही करेगी जिनका समाधान आवश्यक है.

तेलंगाना के मुद्दे पर न्यायधीश श्रीकृष्णा समिति विभिन्न दलों के राजनेताओं, उद्योगपतियों, श्रम संघों, कृषक संघों, महिला संगठनों, और छात्र संगठनों से सलाह मशवरा करेगी ताकि राज्य के सभी तबकों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे क्या कदम उठाए जाएँ यह तय किया जा सके.

न्यायधीश श्रीकृष्णा समिति को अपनी रिपोर्ट 31 दिसंबर 2010 तक सरकार को सौंपनी है.

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