अख़बारों की सुर्खियों में पुणे धमाका

पुणे में धमाके की ख़बर भारत के सभी समाचारपत्रों की सुर्खी बनी है. अख़बार हमले की ख़बरों से भरे हुए हैं और उन्होंने धमाके की तस्वीरें भी पहले पन्ने पर छापी हैं.

कुछ अख़बारों ने इसे आतंकवाद की वापसी बताया है.

हिंदुस्तान की सुर्खी है- इस बार पुणे पर हमला.

अख़बार लिखता है कि मुंबई पर 26/11 के दुस्साहसिक हमले के क़रीब 15 महीने बाद आंतकवादियों ने महाराष्ट्र के दूसरे प्रमुख शहर पुणे को दहला दिया.

ये धमाका कोरेगांव स्थित जर्मन बेकरी को निशाना बनाया गया और ये बेकरी ओशो आश्रम और यहूदी प्रार्थना स्थल के नजदीक है ये बेकरी.

दैनिक भास्कर का शीर्षक है- पुणे में विदेशी थे निशाना.

अख़बार लिखता है कि इस धमाके में मारे गए लोगों में चार विदेशी महिलाएँ हैं और पूछताछ के लिए पाँच लोगों को हिरासत में लिया गया है.

अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स की हेडिंग है- टेरर इज़ बैक यानि आतंकवाद की वापसी.

अख़बार लिखता है कि जिस बेकरी को निशाना बनाया गया, वो विदेशियों में लोकप्रिय थी.

दैनिक जागरण लिखता है कि घायलों में आधा दर्जन विदेशी नागरिक शामिल हैं.

जागरण के अनुसार विस्फोटक स्थल से छह किलो आरडीएक्स मिला.

इस धमाके के बाद दिल्ली, महाराष्ट्र समेत उत्तर भारत के राज्यों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है.

अमर उजाला ने धमाके को लेकर कई अनसुलझे सवालों को उठाया है.

इसमें क्या विदेशी और यहूदी थे निशाने पर थे, क्या धमाके के तार लश्कर से जुड़े हैं, पुणे को ही क्यों चुना गया और खुफ़िया एजेंसियों की चेतावनी की क्या अनदेखी हुई?

नवभारत टाइम्स लिखता है कि ये बेकरी कोरेगांव में हैं जहाँ पास में यहूदी प्रार्थनास्थल और ओशो आश्रम है. ओशो आश्रम में विदेशी आते जाते रहते हैं.

अख़बार लिखता है कि माना जाता है कि आतंकवाद की साज़िश रचने के आरोप में अमरीका में गिरफ़्तार डेविड हेडली 2008 और 2009 में दो बार इस आश्रम में आए थे.

इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि 26/11 के मुंबई धमाकों के बाद पुणे धमाकों ने एक बार फिर शांति तोड़ दी है.

अख़बार लिखता है कि ऐसा लगता है कि हेडली की योजना के अनुसार ही ये धमाका हुआ.

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