सांस्कृतिक और शैक्षणिक शहर सदमे में

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Image caption धमाके की जगह जर्मन बेकरी पर्यटकों और छात्रों के बीच ख़ासा लोकप्रिय है

महाराष्ट्र में पुणे की पहचान राज्य की सांस्कृतिक और शैक्षणिक राजधानी के रुप में होती है, लेकिन जर्मन बेकरी में हुए धमाके के बाद शहर सदमे में है.

जर्मन बेकरी रेस्तरां छात्रों और पर्यटकों के बीच ख़ासा लोकप्रिय है और धमाके के समय वहाँ काफ़ी भीड़ जमा थी.

जब रेस्तरां के एक वेटर ने वहाँ पड़े एक लावारिस बैग को खोला तो ज़ोरदार धमाका हुआ जिससे रेस्तरां और रेस्तरां के बाहर बैठने का स्थान ध्वस्त हो गया, लेकिन रेस्तरां की बिल्डिंग खड़ी रही.

धमाके के स्थान से कुछ दूर अलग ही एक दूसरा बैग भी मिला जिसमें छह किलोग्राम विस्फोटक भरा था. सुराग़ ढूंढने के लिए उसकी जाँच पड़ताल की जा रही है.

महंगा इलाक़ा

जर्मन बेकरी पुणे के आलीशान और महंगे इलाक़े में है. ओशो आश्रम और यहूदियों का चबाड हाउस रेस्तरां के नज़दीक ही स्थित है.

धमाके से घायलों का इलाज जिन तीन अस्पतालों में हो रहा है वहाँ बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, घायलों में अधिकतर की उम्र 25 से 30 साल के बीच है.

जहांगीर अस्पताल के बाहर बड़ी तादाद में छात्र अपने दोस्तों का हालचाल जानने के लिए पहुंचे हैं, जहाँ 11 घायलों का इलाज चल रहा है.

इंजीनियरिंग के एक छात्र योगेश ने कहा, "मेरा दोस्त अदित्य मेहता इस अस्पताल में भर्ती है."

उनका कहना था, "जर्मन बेकरी में छात्र हमेशा मौजूद रहते हैं, ख़ासकर शनिवार की शाम को वहाँ काफ़ी भीड़ रहती है. मैंने कभी भी पुणे में इस तरह का महसूस नहीं किया, लेकिन अब इसका प्रभाव पड़ेगा."

योगेश ने बताया कि उनका दोस्त सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती है और उसकी हालत स्थिर है.

सरकार ने कहा है कि मरने वालों को पाँच लाख रुपए बतौर मुआवज़ा दिया जाएगा जबकि घायलों के इलाज का पूरा ख़र्च उठाएगी.

चिंतित हैं लोग

Image caption धमाके में नौ लोग मारे गए हैं जबकि अनेक घायल हुए हैं

रेस्तरां के बाहर तैनात पुलिसवाले कहते हैं कि अबतक पुणे के लोग अपने को सुरक्षित महसूस करते थे लेकिन अब वो आतंकवादी हमले से चिंतित हैं.

उनका कहना था, "शहर को सचेत करने के लिए एक ही घटना काफ़ी है. अब लोगों के ज़ेहनों में शांति नहीं है. वो कैसे इस तरह के भीड़ वाले और अहम इलाक़े में धमाके करने में सफल हो गए? अब इन मौतों के बाद स्थिति मुश्किल होगी. पुणे एक शांत शहर है, लेकिन अब कुछ नहीं कहा जा सकता."

अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन ऐसे में अटकलों का बाज़ार गर्म है और मीडिया में इंडियन मुजाहेद्दीन, जमात-उद-दावा और लश्करे तैबा पर शक ज़ाहिर किया जा रहा है.

इस बात पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि अक्तूबर में जो अलर्ट दिया गया था उसका क्या हुआ.

केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि अमरीकी मूल के डेविड हेडली ने भी चबाड हाउस और ओशो आश्रम का दौरा किया था. हेडली पर मुंबई हमलों से जुड़े होने का शक है और वे फ़िलहाल अमरीकी हिरासत में हैं.

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