'मुसलमानों को उनका उचित हक़ मिल रहा है'

दोहा बहस
Image caption दोहा बहस में 63 प्रतिशत का मत था कि मुसलमानों के साथ उचित व्यवहार हो रहा है

भारत में आयोजित बीबीसी की चर्चित दोहा बहस के दौरान मौजूद लोगों में से बहुमत का मानना था कि भारत में मुसलमानों को उनके पूरे हक़ मिल रहे हैं.

बहुमत का यह भी मत था कि मुसलमानों के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है.

दोहा बहस बीबीसी टेलीविज़न पर प्रसारित किया जाने वाला एक विश्व प्रसिद्ध कार्यक्रम है जिसका आयोजन क़तर फ़ाउंडेशन करता है और इसके ऐंकर टिम सेबस्टियन हैं.

पहली बार भारत में आयोजित इस बहस का विषय था- 'सदन की राय है कि भारत में मुसलमानों को समुचित हक़ नहीं मिल रहे हैं.'

दिल्ली के सेंट स्टीफ़न्स कॉलेज में आयोजित इस बहस के प्रस्ताव के पक्ष में 37.9 प्रतिशत लोगों ने मत किया जबाकि 62.1 प्रतिशत ने विपक्ष में मत दिया.

बहस में चार विशिष्ट अतिथियों ने हिस्सा लिया जिनमें केंद्रीय राज्य मंत्री सचिन पायलट, वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर, सीमा मुस्तफ़ा और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड थीं.

लोकतंत्र का फ़ायदा

बहस की शुरुआत करते हुए प्रस्ताव के पक्ष में सीमा मुस्तफ़ा ने कहा, "यह सच है कि भारत में मुसलमानों को उनका उचित हक़ नहीं दिया जा रहा है और इसके लिए सरकार, राजनीतिक पार्टियाँ और मुस्लिम नेतृत्व ज़िम्मेदार है."

तीस्ता सीतलवाड ने भी सीमा मुस्तफ़ा के पक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद से ही मुसलमान पिछड़ते जा रहे हैं और सरकारी नौकरियों में उन्हें उचित भागिदारी नहीं मिल रही है.

जबकि प्रस्ताव का विरोध करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि भारत में मुसलमानों के साथ उचित व्यवहार हो रहा है और उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में शामिल होने का अधिकार है.

उनका कहना था, "देश में सिर्फ़ मुसलमान होने की वजह से किसी के साथ भेदभाव नहीं हो रहा है और पिछड़े हुए लोगों को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं, चाहे उनका संबंध किसी भी समुदाय से क्यों न हो."

एमजे अकबर ने भी प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि भारत का मुसलमान पिछले छह दशकों से लोकतंत्र का फ़ायदा उठा रहा है और उसे हर तरह की आजा़दी मिली हुई है.

अकबर ने कहा कि कि सच्चाई पूरी तरह से सफ़ेद और काली नहीं होती है बल्कि सच्चाई इन दो रंगों का मिश्रण है.

लेकिन सीमा मुस्तफ़ा ने एमजे अकबर के उलट गोपाल सिंह कमेटी और सच्चर कमेटी की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि देश में मुसलमान शैक्षणिक, आर्थिक और रोज़गार के मामले में पिछड़ गए हैं.

सीमा ने उचित क़दम नहीं उठाए जाने बारे में कहा कि मुसलमानों के उत्थान के लिए इंदिरा गांधी ने 15 सूत्री कार्यक्रम बनाए थे, लेकिन इसके बाद भी मुसलमानों की स्थिति में बदलाव नहीं हुआ. उनके अनुसार मनमोहन सिंह की सरकार ने भी ऐसे ही कार्यक्रम बनाए हैं जो इस बात को दर्शाता है कि कुछ न कुछ गड़बड़ है.

मुस्लिम भी ज़िम्मेदार

Image caption सचिन ने कहा कि मुसलमान अनेक क्षेत्रों में अग्रणी हैं

सीमा ने मुस्लिम धार्मिक नेताओं को भी आड़े हाथों लिया और कहा है कि इन धर्म गुरुओं ने भी सही दिशा में काम नहीं किया है.

सचिन पायलट ने उचित व्यवहार का ज़िक्र करते हुए कहा कि बॉलीवुड, राजनीति, क्रिकेट, स्पोर्ट्स के क्षेत्रों में मुसलमान शीर्ष पर हैं इसलिए ये प्रस्ताव सही नहीं है.

लेकिन तीस्ता सीतलवाड ने कहा कि स्थिति यह है कि कट्टरपंथी हिंदू मुसलमानों को न केवल राष्ट्र विरोधी मानते हैं बल्कि ग़द्दार भी मानते हैं और उन्हें आतंकवादी कहा जाता है.

तीस्ता ने कहा है कि दंगों की वजह से भी मुसलमान परेशान रहे हैं लेकिन एमजे अकबर ने कहा है कि अब स्थिति बदल गई है और देश इससे आगे बढ़ गया है.

दर्शकों में से एक तानिया ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि देखने में ऐसा लगता है कि सभी मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है लेकिन सच्चाई यह है कि ग़रीब मुसलमानों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है जबकि इस समुदाय के अगड़ों को प्रतिनिधित्व मिल रहा है और वो उनके उत्थान के लिए सही दिशा में काम नहीं कर रहे हैं.

बहस में इस बात से सभी सहमत थे कि मुसलमानों को आगे बढ़ाने की ज़रूरत है.

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