भारत-पाक वार्ता को लेकर ऊहापोह

Image caption पुणे धमाके के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली सचिव स्तर की बातचीत पर सवाल खड़े हो गए हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच 25 फ़रवरी को दिल्ली में होने वाली सचिव स्तर की बातचीत को लेकर ऊहापोह जारी है.

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने रविवार को ये तो कहा कि चरमपंथी भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली विदेश सचिव स्तरीय वार्ता में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं.

लेकिन उन्होंने पुणे धमाके के मद्देनज़र पाकिस्तान के साथ सचिव स्तर की बातचीत के भविष्य पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

चेन्नई में पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "इस समय मैं सचिव स्तर की बातचीत पर कुछ नहीं कहना चाहता. पहले जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार कीजिए."

भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि भारत सरकार फंस गई है. अब वो वार्ता से पीछे हटती है तो लोग नुक्ताचीनी करेंगे.

उल्लेखनीय है कि शनिवार को पुणे की जर्मन बेकरी में हुए धमाके में नौ लोग मारे गए थे और 50 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.

पाकिस्तान आशांवित

ग़ौरतलब है कि वर्ष, 2008 में 26 नवंबर को मुंबई में हुए हमलों के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है.

लेकिन कुछ दिनों पहले दोनों देशों ने सचिव स्तर की बातचीत पर सहमति दिखाई थी और 25 फ़रवरी को सचिव स्तर की बातचीत दिल्ली में होने वाली है.

दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने पुणे में हुए धमाके की आलोचना की है.

प्रधानमंत्री गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा करता है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि वे भारत के साथ अगले सप्ताह होने वाली बातचीत को लेकर काफ़ी उत्साहित हैं.

पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "पाकिस्तान भारत के साथ बेहतर संबंध के साथ-साथ सार्थक बातचीत भी चाहता है."

लेकिन भारत की प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने ने पुणे धमाके के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया है और बातचीत न करने की मांग की है.

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