'दस जवान लापता, 24 मारे गए'

हमले के बाद का दृश्य
Image caption भीषण हमले में फ़ायरिंग के बाद कैंप में आग लगा दी गई जिससे कई जवान ज़िंदा ही जल गए

पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर ज़िले में माओवादियों ने सोमवार की शाम सिल्दा में सुरक्षा बलों के एक शिविर पर धावा बोल दिया. ताज़ा जानकारी के मारे इस हमले में मारे गए सुरक्षाकर्मियों की संख्या 24 हो गई है जबकि कम से कम दस लापता है.

बीबीसी के पश्चिम बंगाल संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार राज्य के पुलिस प्रमुख भूपेंद्र सिंह ने बताया है कि इस हमले में तीन माओवादी भी मारे गए लेकिन उनके साथी उनके शव अपने साथ ही उठा ले गए. उनके अनुसार इस शिविर से माओवादियों ने 40 बंदूकें भी लूट ली हैं.

सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता कोटेश्वर राव ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा है, "पी चिदंबरम के ग्रीन हंट के जवाब में यह हमारा पीस हंट है."

उधर बीबीसी के झारखंड संवाददाता सलमान रावी ने ख़बर दी है कि सोमवार को देर रात माओवादियों ने झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के पास सीआरपीएए के एक कैंप पर भी हमला किया है और वहां मंगलवार की सुबह तक मुठभेड़ जारी है.

'अत्याधुनिक हथियारों से भीषण हमला'

पश्चिम बंगाल में नक्सलियों का हमला लालगढ़ से सटे सिल्दा में इस्टर्न फ़्रंटियर राइफ़ल्स के जवानों ने कैंप पर हुआ है.

Image caption हमले में घायल कई जवानों की हालत चिंताजनक बनी हुई है

बीबीसी के पश्चिम बंगाल संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार ये कैंप नया है और अभी वहाँ सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम नहीं किए गए थे. यानी वहाँ गश्त वगैरह का पूरा इंतज़ाम नहीं था.

पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख भूपेंद्र सिंह ने बताया, "अर्धसैनिक बल ईस्टर्न फ़्रॉंटियर राईफ़ल्स के 51 जवान इस कैंप में रह रहे थे. सोमवार शाम 25 मोटरसाइकिलों पर सवार क़रीब 50 माओवादियों ने कैंप को घेर कर हमला किया. उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे. कुछ अन्य माओवादी भी इस दौरान हमलावरों के साथ हो लिए. पहले उन्होंने अंधाधुंध फ़ायरिंग की और फिर कैंप को आग लगा दी."

उनका कहना है कि शुरु में जवानों ने इस हमले का मुकाबला करने की कोशिश की लेकिन वे अचानक हुए हमले से हैरान-परेशान हो गए और माओवादियों ने कैंप को तहस-नहस कर दिया.

पुलिस का कहना है कि जिस समय नक्सलियों का एक गुट हमला कर रहा था दूसरा गुट कैंप से हथियार जमा करने में लगा हुआ था. इन हथियारों को नक्सली अपने साथ ले गए. अधिकारियों का कहना है कि जिस समय हमला हुआ ज़्यादातर जवान या तो आराम कर रहे थे या फिर शाम का खाना बनाने की तैयारी कर रहे थे.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एनएस निगम के अनुसार जाते-जाते नक्सली कैंप तक जाने वाली पूरी सड़क के आसपास बारूदी सुरंग बिछाकर चले गए. देर रात बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने वाले उपक्रमों और रात में लड़ाई के लिए उपयुक्त हथियारों से लैस अतिरिक्त पुलिस बल घटनास्थल तक पहुँचे.

कैंप से कई जवानों के गोलियों के छलनी, जले और अधजले शव मिले हैं.

पश्चिम बंगाल के ख़ुफ़िया विभाग के अधिकारी अपराजित मुखर्जी ने बीबीसी को बताया कि दोपहर एक बजे उन्होंने एलर्ट जारी किया था कि सिल्दा से 20-25 मिनट की दूरी पर कुछ नक्सली एकत्रित हो रहे हैं. उनका कहना है कि आरंभिक सूचना के आधार पर एक चेतावनी दे दी गई थी.

'पीस हंट'

इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रवक्ता कोटेश्वर राव उर्फ़ किशनजी ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

Image caption नक्सली अपने साथ बहुत सारा हथियार लूट कर ले गए हैं

उन्होंने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "हमारा हमला सफल रहा है. हम वहाँ से हथियार भी ले गए हैं. ये गृह मंत्री पी चिदंबरम के ऑपरेशन ग्रीन हंट का जवाब है."

उन्होंने नक्सलियों के हमले को पीस हंट का नाम दिया है. किशनजी ने कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं और ऐसे हमले भी रोक सकते हैं लेकिन इससे पहले सरकार को अपना अभियान ग्रीन हंट रोकना होगा.

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