बिहार के आबकारी मंत्री बर्ख़ास्त

शराब
Image caption आबकारी मंत्री ने मुख्यमंत्री की भूमिका पर ही सवाल उठाए थे.

बिहार में कथित आबकारी घोटाले के लिए सरकारी महकमे पर ही उंगली उठाने वाले आबकारी मंत्री जमशेद अशरफ़ को मंत्रिमंडल से बर्ख़ास्त कर दिया गया है.

उन्होंने सरकारी महकमे को ही शराब माफिया बताते हुए इस मामले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे.

मुख्यमंत्री ने कुछ दिनों की चुप्पी के बाद अचानक इस पर कड़ा रुख़ अख़्तियार किया. उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए जमशेद अशरफ़ से जवाब तलब किया और उसके बाद गुरुवार को उन्हें मंत्रिमंडल से बर्ख़ास्त कर दिया.

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जमशेद अशरफ़ को भेजे पत्र में मुख्यमंत्री ने पूछा था, “मेरे नाम आपका गोपनीय पत्र मीडिया तक कैसे पहुंचा ? कथित शराब घोटाले के संदर्भ में आपने मंत्री पद पर रहते हुए न सिर्फ़ विभागीय अधिकारी बल्कि मेरी भूमिका पर भी मीडिया में बयान दिया है. यह आपका अपनी ही सरकार के खिलाफ़ अमर्यादित आचरण है."

मुख्यमंत्री ने जमशेद अशरफ़ को मंत्री पद से त्याग पत्र देने या बर्ख़ास्तगी के लिए तैयार रहने के स्पष्ट संकेत दे दिए थे.फिलहाल अशरफ़ चेन्नई में अपनी आँख का इलाज कराने गए हुए हैं.

अशरफ़ के आरोप

सबसे पहले सात जनवरी को ही जमशेद अशरफ़ ने बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में अपने विभाग में कथित घपलों की जानकारी दी थी.

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बिहार के आबकारी मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में स्वीकारा था कि राज्य का आबकारी महकमा ही सबसे बड़ा शराब माफिया है.

इतना ही नहीं, मंत्री ने ये भी कह दिया था कि देसी-विदेशी शराब से जुड़े यहाँ लगभग ढाई हज़ार करोड़ रुपए के मार्केट में से अधिकांश अवैध तरीक़े से लूटा जा रहा है.

लेकिन जो बात नीतीश कुमार को बहुत ज़्यादा चुभ गई, वो ये है कि जमशेद अशरफ़ ने इस बाबत मुख्यमंत्री की भूमिका पर भी उंगली उठा दी थी.

उन्होंने कह दिया था कि नीतीश कुमार इस विभाग में कुछ ख़ास अफसरों के ख़िलाफ़ शिकायतों पर कान नहीं देते और अपने मंत्री या नेता की नहीं सिर्फ़ नौकरशाहों की सुनते हैं.

बाद में जब अख़बारों में भी अरबों रूपए के इस कथित घोटाले की ख़बरें छपने लगीं, तब मुख्यमंत्री इन आरोपों के खंडन और आबकारी मंत्री पर कार्रवाई के लिए गंभीर रूप से सक्रिय हो गए.

उन्होंने बुधवार को जमशेद अशरफ़ को भेजे गए अपने गोपनीय पत्र के साथ 13 पन्नों की एक जांच रिपोर्ट भी भेजी है.

राज्य के मुख्यसचिव से कराई गई जांच की इस रिपोर्ट में न सिर्फ अशरफ़ के आरोपों को ग़लत ठहराया गया है, बल्कि कुछ बिंदुओं पर विभागीय मंत्री को दोषी बताया गया है.

दिलचस्प ये भी है कि मुख्यमंत्री ने जो गोपनीय पत्र अपने आबकारी मंत्री को लिखा है, वो यहाँ के अख़बारों में गुरुवार को, यानी अगले ही दिन मुख्यमंत्री की प्रतिक्रियाओं के साथ कैसे लीक हो गया, इसकी चर्चा हो रही है.

कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, लोक जनशक्ति पार्टी और वामपंथी दलों ने अरबों रूपए के इस कथित घोटाले की सीबीआई से जाँच कराने की मांग की है.

22 फ़रवरी से बिहार विधान सभा का बजट अधिवेशन शुरू होने जा रहा है, जिसमें इस मामले पर भारी हंगामे की संभावना है.

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