ग़लत नीतियों से बढ़ी महंगाई: भाजपा

राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान भाजपा नेता (साभार भाजपा वेबसाइट)
Image caption यशवंत सिन्हा के अनुसार सरकार की ग़लत नीतियों से समस्या पैदा हुई है

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के आख़िरी दिन भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की तीखी आलोचना की है. उन्होंने घोषणा की है कि महंगाई के मुद्दे पर भाजपा ने सरकार का संसद से सड़क तक विरोध करने का फ़ैसला किया है.

भाजपा 21 अप्रैल को महँगाई के मुद्दे पर संसद का घेराव करेगी और एक मार्च से 31 मार्च तक इसी मुद्दे पर ये हस्ताक्षर अभियान कराएँगे. पार्टी का लक्ष्य है कि महँगाई के विरोध में पाँच लाख हस्ताक्षर एकत्र किए जाएँ और राष्ट्रपति को सौंपे जाएँ.

दूसरी तरफ़ पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपने संबोधन में राजनीतिक मूल्यों में गिरावट, परिवारवाद और मीडिया की रिपोर्टिंग को निशाना बनाया है.

लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर भारत सरकार की नीति देशहित में नहीं है और भाजपा प्रस्तावित भारत-पाक बातचीत, जम्मू-कश्मीर को स्वायत्ता का विरोध करती है,

उनका कहना था कि यदि यूपीए सरकार 1953 से पहले की स्थिति पर लौटने की बात करती है तो पूरे देश में बड़ा राजनीतिक आंदोलन खड़ा हो जाएगा.

राजनीतिक पार्टियों में परिवारवाद और पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र का ज़िक्र करत हुए आडवाणी ने कहा, "जिस तरह से नितिन गडकरी को पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए चुना गया है वो सिद्ध करता है कि भाजपा (पार्टी विद ए डिफ़रेंस) एक अलग और विशेष पार्टी है."

उन्होंने दुख जताते हुए कहा, "कांग्रेस की देखादेखी देश की दूसरी राजनीतिक पार्टियों ने भी योजनाबद्ध तरीक़े से अपने यहाँ परिवारवाद को अपना लिया है."

आर्थिक प्रस्ताव

इंदौर में पार्टी का आर्थिक प्रस्ताव पेश करते हुए यशवंत सिन्हा ने कहा कि 2004 में यूपीए को मज़बूत अर्थव्यस्था मिली थी लेकिन इस सरकार ने अपनी ग़लत नीतियों से समस्याएँ पैदा की हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए वैश्विक आर्थिक संकट को ज़िम्मेदार बता रही है. उनका कहना था कि इस बहाने सरकार ने आर्थिक पैकेज के नाम पर सरकारी ख़ज़ाना खोल दिया है.

केंद्र सरकार पर आरोपों की बौछार लगाते हुए पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा, "आर्थिक पैकेज देने से यूपीए का राजनीतिक स्वार्थ तो पूरा हो गया लेकिन सरकार का घाटा बहुत बढ़ गया है जिससे महंगाई बढ़ी है. भाजपा ने इस मामले पर संयुक्त संसदीय समिति की जाँच की माँग की है."

उन्होंने कहा कि इसके लिए सोनिया गांधी सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं. उनका कहना था कि कांग्रेस केंद्रीय कृषि मंत्री 'पवार को दोषी ठहराती है तो पवार कांग्रेस को.....ये तो मज़ाक है.'

राष्ट्रीय अधिवेशन में भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता हिस्सा रहे हैं. इनमें पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और लालकृष्ण आडवाणी शामिल है.

चुनौती

Image caption राष्ट्रीय अधिवेशन में भाजपा के सभी आला नेता हिस्सा रहे हैं

ये अधिवेशन ऐसे समय हो रहा है कि जब पिछले साल ही पार्टी को लोक सभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है और पार्टी में अंतर कलह की बातें बाहर आने लगीं.

तीन दिवसीय बैठक में नितिन गडकरी को औपचारिक तौर पर पार्टी अध्यक्ष चुना गया. इस तरह पार्टी की कमान लाल कृष्ण आडवाणी के हाथों से निकलर युवा नेताओं के हाथ में चली गई है.

इससे पहले गुरुवार को अपने भाषण में नितिन गडकरी ने कहा था कि 21वीं सदी भारत की सदी होगी क्योंकि ये सूचना प्रौद्योगिकी और बायो टेक्नोलॉजी का दौर है जिसमें भारत दूसरे देशों से बहुत आगे है.

अपने भाषण के बिल्कुल अंत में उन्होंने राम मंदिर का ज़िक्र करते हुए कहा था कि राम मंदिर हमारी आत्मा है लेकिन मंदिर बनाने के लिए उन्होंने मुसलमानों से अनुरोध किया के वे ख़ुद आगे आएँ.

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