विधानसभा के घेराव को लेकर कड़ी सुरक्षा

हैदराबाद

तेलंगाना समर्थक छात्रों की संयुक्त संघर्ष समिति ने शनिवार को आंध्र प्रदेश विधान सभा के घेराव का आह्वान किया है.

इसके मद्देनज़र हैदराबाद में सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए गए हैं और विधानसभा की ओर जाने वाले तमाम रास्तों को बंद किया जा रहा है.

शनिवार शाम तक के लिए विधानसभा के सामने से गुज़रने वाली सड़क सामान्य ट्रैफ़िक के लिए बंद रहेगी.

इसके अलावे नज़दीक की दूसर सड़कों और चार फ़्लाई ओवर्स को भी बंद कर दिया गया है और ट्रैफ़िक का रुख़ फेर दिया गया है.

विधानसभा के आसपास पुलिस के साथ-साथ अर्ध सैनिक दलों के दस्तों को भी तैनात कर दिया गया है.

फ़ैसला

छात्रों की संघर्ष समिति ने गत रविवार और सोमवार को उस्मानिया विश्वविद्यालय कैंपस में पुलिस और केंद्रीय पुलिस बल की ओर से छात्र-छात्राओं के साथ बुरी तरह मार पीट और अन्य घटनाओं के ख़िलाफ़ विधानसभा के घेराव का फ़ैसला किया है.

विधानसभा का घेराव ऐसे समय हो रहा है जब शनिवार को ही मुख्यमंत्री के रोसैया राज्य का वार्षिक बजट प्रस्तुत करने वाले हैं.

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अब्दुल क़यूम ख़ान ने कहा कि शहर में निषेधाज्ञा लगा दी गई है और किसी को विरोध प्रदर्शन करने या जुलूस निकलने की अनुमति नहीं है.

उन्होंने कहा कि पुलिस को ऐसी सूचना है कि हिंसा हो सकती है इसलिए उन्होंने तेलंगाना के दूसरे ज़िलों के छात्रों से कहा है कि वो हैदराबाद न आएँ.

पुलिस आयुक्त ने कहा कि पुलिस को नहीं मालूम की छात्र प्रदर्शनकारी किस दिशा से आएंगे और क्या करेंगे, इसलिए शांति और क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रास्तों को बंद किया जा रहा है.

तैयारी

उन्होंने लोगों से कहा कि वो भी शनिवार को अपना काम सीमित रखें और ट्रैफ़िक जाम का सामना करने के लिए तैयार रहें.

मुख्यमंत्री के रोसैया ने भी छात्रों से अनुरोध किया है कि वो अपना कार्यक्रम रद्द कर दें क्योंकि असामाजिक तत्व उसका फ़ायदा उठाकर अशांति फैला सकते हैं.

लेकिन छात्रों की संघर्ष समिति अपने आंदोलन पर अटल है.

छात्र अपना यह आंदोलन एक ऐसे समय पर कर रहे हैं जब तेलंगाना में तनाव पहले ही से बढ़ा हुआ है और राजनैतिक स्तर पर एक सस्पेंस बना हुआ है.

जहाँ तेलंगाना राष्ट्र समिति के सभी 10 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है, वहीं कांग्रेस और तेलुगूदेशम के विधयाकों ने इस्तीफ़ा देने के संयुक्त संघर्ष समिति के निर्देश की अनदेखी कर दी है.

इस पर नाराज़ तेलंगाना समर्थक कार्यकर्ता, छात्र और युवा उन नेताओं और मंत्रियों के निवास स्थानों का घेराव कर रहे हैं जिन्होंने त्यागपत्र नहीं दिया है.

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