संगीत से दिमाग़ तेज होता है

Image caption संगीत से बच्चों में तीन साल की उम्र तक पैदा होने वाली अक्षमताएं दूर की जा सकती हैं

कहते हैं कि संगीत में बड़ी ताक़त होती है. संगीत आग पैदा कर सकता है, पत्थर को पिघला सकता है, मुर्दे में जान ला सकता है, पानी बरसा सकता है. ऐसे कितने ही जुमले संगीत के ताने-बाने पर बजते नज़र आते हैं.

पर एक फ़र्क असल ज़िंदगी में और सामने आया है और यकीन मानिए, यह जुमला नहीं, शोध का नतीजा है. शोध कहता है कि संगीत का दिमाग के स्वास्थ्य और विकास से गहरा ताल्लुक है.

नए शोध से यह बात सामने आई है कि संगीत से बच्चों के भाषायी दक्षता को सुधारने में मदद मिलती है. जब आपका बच्चा वाद्ययंत्र बजाता है तो इस प्रक्रिया में आवाज के प्रति उसके दिमाग की संवेदनशीलता में खासा इज़ाफ़ा होता है.

न्यूरोसाइंटिस्ट प्रोफेसर नीना क्राउस ने शिकागो स्थित नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी स्थित अपने दल के साथ किए गए शोध के आधार पर कहा है कि संगीत से न केवल बच्चों का दिमागी विकास होता है बल्कि यह उसके लिए हर तरह से फायदेमंद साबित होता है.

इससे डायलेक्सिया और तीन साल की उम्र तक बच्चों में पैदा होने वाली अक्षमताओं को दूर करने में मदद मिलती है.

प्रोफेसर नीना क्राउस ने कहा, ‘‘जो स्कूल मुख्य पाठ्यक्रम से संगीत हटा रहे हैं, वे एक भूल कर रहे हैं.’’

दिमाग़ का विकास

शोधकर्ताओं ने साबित किया कि तंत्रिका तंत्र संगीत के ध्वनि संबंधी गुणों पर एक सेकेंड के 1000वें हिस्से से भी कम समय के भीतर प्रतिक्रिया करता है. ध्वनि प्रतिरूपों की व्याख्या करने वाली तंत्रिका तंत्र की क्षमता संगीतमय योग्यता से जुड़ी होती है.

प्रोफेसर नीना क्राउस कहती हैं, ‘‘संगीत औऱ गायन के दौरान संगीतकारों का तंत्रिका तंत्र कहीं अधिक प्रभावी होता है.’’

शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि अगर आप वाद्ययंत्र बजाते हैं तो इससे मस्तिष्क के निचले हिस्से ब्रेनस्टेम पर अच्छा असर पड़ता है. ब्रेनस्टेम से ही सांस लेने की प्रक्रिया और हृदय की धड़कन नियंत्रित की जाती हैं.

उन्होंने कहा कि संगीत बुनियादी तौर पर दिमाग को ऐसा स्वरूप प्रदान करता है जिससे पढ़ने-लिखने और सुनने सहित रोज़मर्रा के कामकाज में मदद मिलती है.

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