महँगाई के मुद्दे पर संसद में हंगामा

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Image caption विपक्ष की संसद सत्र के दौरान महंगाई के मुद्दे को जोरशोर से उठाने की योजना है

भारतीय संसद के दोनों सदनों में मंगलवार को महँगाई का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठा और विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने इस पर अविलंब चर्चा कराने की माँग की.

भारी शोरगुल के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.

राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई वरिष्ठ नेता सदन की कार्यवाही शुरु होते ही अध्यक्ष के आसन के पास चले गए और स्थगन प्रस्ताव लाकर महँगाई पर चर्चा कराने की माँग की.

भारी शोरगुल के बीच राज्यसभा के अध्यक्ष हामिद अंसारी ने कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी. लेकिन दोबारा कार्यवाही शुरु होने पर भी विपक्षी सदस्य शांत नहीं जिसके बाद सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई.

यही हाल लोकसभा का रहा जहाँ विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए काम रोको प्रस्ताव के तहत चर्चा कराने की माँग की.

उन्होंने कहा, "एनडीए के अलावा भी कई नेताओं ने काम रोको प्रस्ताव दिया है, लेकिन सरकार इसके तहत चर्चा कराने को तैयार नहीं है."

स्थगन प्रस्ताव की माँग कर रहे विपक्षी दलों ने संसदीय मामलों के मंत्री पवन बंसल की इस बारे में आपत्ति पर ख़ासा हंगामा किया और सदन की कार्यवाही को एक घंटे के लिए रोक दिया गया.

लेकिन दोबारा कार्यवाही शुरु होने पर पूरा विपक्ष एक साथ हो गया और वे नारे लगाने लगे जिसके बाद अध्यक्ष मीरा कुमार ने कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी.

चर्चा के नियम पर मतभेद

इससे पहले लोकसभा में भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा था कि महँगाई पर चर्चा मंगलवार की कार्यवाही के दौरान विपक्ष की पहली प्राथमिकता है.

प्रारंभिक टिप्पणी में समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव ने खेद जताया कि सरकार के पास गोदाम में पर्याप्त अनाज है लेकिन फिर भी ग़रीब लोग मर रहे हैं.

संसदीय मामलों के मंत्री पवन बंसल ने कहा कि सरकार किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थगन प्रस्ताव और बहस इसलिए मांगी है क्योंकि महँगाई लगातार पिछले छह साल से बढ़ रही है.

पवन बंसल का कहना था कि बहस का केवल यही कारण बताया गया है और नियमों के अनुसार ये स्थगन प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है. पवन बंसल का कहना था कि सत्तापक्ष नौ घंटे के लिए चर्चा चाहता है जबकि स्थगन प्रस्ताव में केवल ढाई घंटे की चर्चा होती है.

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