उल्फ़ा के दो वरिष्ठ नेताओं को ज़मानत

फ़ाइल फ़ोटो
Image caption उल्फ़ा के पृथकतावादियों और सुरक्षाबलों में अक्सर टकराव होता रहता है

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में विशेष अदालत ने असम के अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा) के दो वरिष्ठ नेताओं को ज़मानत दे दी है.

इनमें से एक उल्फ़ा के उपप्रमुख प्रदीप गोगोई हैं. वो पिछले 12 वर्ष से जेल में बंद थे.

दिलचल्प तथ्य ये है कि राज्य सरकार ने अदालत के फ़ैसले का विरोध नहीं किया.

इससे ये माना जा रहा है कि भारत सरकार पृथकतावादियों के साथ जल्द बातचीत शुरू करने जा रही है.

पिछले दिनों उल्फ़ा के चेयरमैन अरबिंद राजखोवा को हिरासत में लिया था.

भारत सरकार का कहना था कि राजखोवा ने सीमा सुरक्षा बल के सामने आत्मसमर्पण किया था.

संघर्ष

ग़ौरतलब है कि वर्ष 1979 से उल्फ़ा असम की स्वतंत्रता की मांग करते हुए संघर्ष कर रहा है.

उल्लेखनीय है कि राजखोवा ने वर्ष 1992 में केंद्र सरकार के साथ बातचीत शुरू करने की पहल की थी लेकिन परेश बरुआ की सैन्य अलगाववादी आंदोलन जारी रखने की प्रतिबद्धता के कारण ये कोशिश नाकाम हो गई.

वर्ष 2006 में एक बार फिर बातचीत की कोशिश नाकाम हो गई.

उस समय नागरिकों की एक मध्यस्थता समिति बनी थी. लेकिन उस समय उल्फ़ा ने संघर्षविराम की घोषणा और बातचीत के दौरान हिंसा छोड़ने से इनकार कर दिया था.

जब से बांग्लादेश में आवामी लीग ने सत्ता संभाली है, उल्फ़ा और पूर्वोत्तर के अन्य अलगाववादी संगठनों पर देश छोड़ने का दबाव बढ़ रहा है.

कुछ अलगाववादी नेताओं को गिरफ़्तार करके भारत को सौंप दिया गया है जबकि अन्य लोगों को पूछताछ के लिए रोका गया है ताकि बांग्लादेश में उनके ठिकाने का पता लगाया जा सके.

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