पश्चिंम बंगाल का रेल बजट:भाजपा

नीतीश कुमार, बिहार के मुख्यमंत्री
Image caption नीतीश का कहना है कि घोषित योजनाओं पर पहले काम शुरु किया जाना चाहिए

भारत की विपक्षी पार्टियों ने ममता बनर्जी के वर्ष 2010-11 के रेल बजट की तीखी आलोचना की है, जबकि सबसे बड़े विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इसे पश्चिम बंगाल का रेल बजट करार दिया है.

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को वर्ष 2010-11 का रेल बजट पेश किया और यात्री किरायों के साथ-साथ माल भाड़े में भी कोई बदलाव नहीं किया है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार ने रेल बजट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा, "बजट में सब कुछ बंगाल, बाक़ी सब कंगाल."

अनंत कुमार के अनुसार ममता बनर्जी ने केवल अपने पैतृक राज्य को अहमियत दी है और अन्य राज्यों की अनदेखी की है.

जबकि बिहार के मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि रेलवे को बिहार की उन परियोजनाओं पर काम शुरू करना चाहिए जिनकी घोषणा पहले के रेल बजट में की गई थी.

उनका कहना था कि बिहार के लिए घोषित परियोजनाओं पर काम बंद नहीं होना चाहिए.

कोरा काल्पनिक

पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने ममता बनर्जी के रेल बजट की आलोचना की है और कहा है यह कोरा काल्पनिक है.

लालू का कहना था कि ममता की घोषणाएं छलावा हैं क्योंकि इन घोषणाओं के कार्यान्वयन के लिए रेलवे के पास कोश नहीं है और रेलवे की हालत जर्जर है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री राम नाइक ने भी रेल बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा, "पिछले साल के रेल बजट में मुंबई के कई स्थानीय रेलवे स्टेशनों को उन्नत बनाने की बात की गई थी, लेकिन किसी भी स्टेशन पर काम भी शुरू नहीं हो सका. इसलिए जो घोषणाएं की जा रही हैं उनपर काम भी शुरू कराया जाए."

उधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी राजा ने कहा कि ममता बनर्जी का रेल बजट यथार्थवादी नहीं है और इसमें रेलमंत्री ने घोषणाएँ तो कई की हैं, लेकिन यह नहीं बताया है कि रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है.

जबकि रेल बजट पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद और पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी नवजोत सिंह सिद्धू का कहना था, "यह बजट आशाओं का बजट है, प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) का बजट है, लेकिन देश का बजट नहीं है."

सिद्धू ने कहा, "रेल बजट भेदभावपूर्ण है और केवल पश्चिम बंगाल का ध्यान रखा गया है, पूरे देश का नहीं.पंजाब की भी अनदेखी की गई है"

उन्होंने सवाल उठाया कि रेल मंत्रालय का उद्देश्य लाभ कमाना है या लोगों की सेवा करना.

संबंधित समाचार