आरक्षण से यूपीए के साथी नाराज़

भारतीय संसद
Image caption अभी विधेयक को लोकसभा में पारित करवाने की चुनौती है

मंगलवार की शाम राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो गया. यूपीए के सामने अब इस विधेयक को लोकसभा और देश की कम से कम आधी विधानसभाओं में पारित करवाने की चुनौती है.

लेकिन इससे ज़्यादा बड़ी चुनौती इस समय यह है कि सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, समाजवादी पार्टी (एसपी) के मुलायम सिंह यादव समर्थन से अपना हाथ खींच रहे हैं.

लालू प्रसाद ने घोषणा कर दी है कि वे बुधवार को राष्ट्रपति से मिलकर समर्थन वापसी की चिट्ठी उन्हें सौंप देंगे.

तो मुलायम सिंह यादव ने इस मसले पर विचार करने के लिए बुधवार को संसदीय दल की बैठक बुलाई है.

ये दोनों नेता पहले ही घोषणा कर चुके थे कि यदि सरकार ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के विधेयक को वर्तमान स्वरुप में ही पारित करवाया गया तो वे समर्थन वापस ले लेंगे.

वैसे नाराज़ तो सरकार में शामिल और यूपीए की एक महत्वपूर्ण घटक ममता बैनर्जी भीं लेकिन उन्होंने फ़िलहाल यूपीए को यह राहत दे दी है कि वे गठबंधन से अलग नहीं हो रही हैं.

राज्यसभा में मंगलवार को महिला आरक्षण विधेयक पारित हो गया था. इसके पक्ष में 186 मत पड़े और विरोध में सिर्फ़ एक मत पड़ा.

नाराज़गी

हालांकि आरजेडी और एसपी के समर्थन वापसी से सरकार को प्रत्यक्ष रुप से कोई ख़तरा नहीं दिखता और यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी भी यूपीए के स्थायित्व को लेकर आश्वस्त हैं.

अंकगणित के अनुसार दोनों दल यदि अपने 25 सांसदों के साथ समर्थन वापस ले भी लेते हैं तो सरकार के बहुमत पर असर नहीं पड़ेगा.

लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दोनों दलों का यह फ़ैसला यूपीए के लिए असुविधाजनक तो है ही.

लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव दोनों मांग कर रहे हैं कि महिलाओं को दिए जा रहे आरक्षण में पिछड़े वर्ग और मुसलमान महिलाओं को आरक्षण देने की अलग से व्यवस्था की जानी चाहिए.

ये दोनों नेता राज्य सभा में अपने सांसदों को निलंबित किए जाने और फिर उन्हें मार्शल की सहायता से बाहर निकाले जाने से भी नाराज़ हैं.

उल्लेखनीय है कि सोमवार को राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक की प्रतियाँ फाड़ने की घटना के बाद एसपी के चार और आरजेडी के एक सांसद सहित कुल सात सांसदों को बजट सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया है.

लालू प्रसाद यादव ने कहा है, "यह आपातकाल और तानाशाही की शुरुआत है, इन लोगों ने संसद को थाना बना दिया है."

इसी तरह मुलायम सिंह यादव ने भी कहा है कि वे इसके ख़िलाफ़ देश में आंदोलन चलाएँगे.

उनका कहना था, "देश में 1977 से भी बड़ा आंदोलन होगा."

लालू प्रसाद यादव यूपीए की पिछली सरकार में एक महत्वपूर्ण सहयोगी थे जबकि मुलायम सिंह की पार्टी ने सरकार को परमाणु समझौते के मसले पर मुसीबत से उबरने में सहायता की थी.

हालांकि सोनिया गाँधी ने विधेयक पर चर्चा करने के लिए दोनों नेताओं से मिली थीं लेकिन वे उन्हें मना पाने में सफल नहीं हुईं.

ममता भी नाराज़

यूपीए के अहम सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस की नेता और रेलमंत्री ममता बैनर्जी भी महिला आरक्षण विधेयक पर नाराज़ हो गई हैं.

यह नाराज़गी इतनी अधिक है कि उनके सांसदों ने मंगलवार को राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक के लिए हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

ममता बैनर्जी की मांग है कि महिला आरक्षण विधेयक में मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान होना चाहिए.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की बड़ी संख्या को देखते हुए वे एक राजनीतिक चाल चल रही हैं जिससे कि आगामी स्थानीय निकायों के चुनाव और विधानसभा चुनावों में उन्हें इसका लाभ मिल सके.

लेकिन यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी को उनकी यह नाराज़गी समझ में नहीं आ रही है.

एक टेलीविज़न को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, "मंत्रिमंडल की बैठक में ममता बैनर्जी के बगल में बैठे एक सहयोगी ने बताया कि जब महिला विधेयक का प्रस्ताव आया तो वे ख़ुशी से उछल पड़ीं थीं."

सोनिया गांधी ने विश्वास जताया है कि ममता बैनर्जी को शीघ्र की मना लिया जाएगा.

संबंधित समाचार