चिकित्सा विभाग की बड़ी लापरवाही

टीके (फ़ाइल फ़ोटो)

सभी बच्चों की चिकित्सा जाँच रविवार से शुरू हो रही है.

राजस्थान के करौली ज़िले में चिकित्सा विभाग की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है.

वहाँ कुछ बच्चों को खसरे की रोकथाम के लिए जो टीके लगाए गए उनकी मियाद ख़त्म हो चुकी थी.

इस मामले के सामने आने के बाद ज़िलाधिकारी नीरज के पवन ने चिकित्सा विभाग के दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है.

राज्य सरकार ने भी पूरे मामले की रिपोर्ट ज़िला प्रशासन से माँगी है.

हम इन सभी बच्चों की जाँच करा रहे हैं ताकि कोई संशय न रहे. हालाँकि जो टीके लगाए गए उनकी मियाद 19 दिन पहले ही ख़त्म हुई थी.

ज़िलाधिकारी नीरज पवन

ज़िलाधिकारी नीरज पवन ने बीबीसी को बताया कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया है और जिस बैच के ये टीके थे उन पर रोक लगा दी गई है.

ये टीके पड़ोसी भरतपुर ज़िले से करौली लाए गए थे लेकिन चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों ने इनकी एक्सपायरी डेट नहीं देखी.

यही टीके बच्चों को लगाए जा रहे थे. अचानक एक अभिभावक ने इन टीकों पर अंकित तारीख़ पर नज़र डाली और प्रशासन को सूचित किया.

इसके बाद टीकाकरण अभियान रुकवाया गया लेकिन जिन बच्चों को टीके लग चुके हैं उनके अभिभावक बेहद चिंतित हैं.

ज़िला प्रशासन के मुताबिक पिछले दो महीने में लगभग पाँच हज़ार बच्चों को टीके लगे हैं.

ज़िलाधिकारी ने बताया, "हम इन सभी बच्चों की जाँच करा रहे हैं ताकि कोई संशय न रहे. हालाँकि जो टीके लगाए गए उनकी मियाद 19 दिन पहले ही ख़त्म हुई थी."

इन बच्चों की जाँच के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं जो रविवार से काम शुरु कर देगी. प्रशासन उस कंपनी के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई करेगा जिसने ये टीके भेजे थे.

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