माओवादी नेता आज़ाद सुरक्षित

माओवादी
Image caption माओवादियों के ख़िलाफ़ कई राज्यों में कार्रवाई चल रही है

देश की सबसे बड़ी नक्सलवादी संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने घोषणा की है कि उसके सबसे बड़े नेताओं में से एक और पोलित ब्यूरो सदस्य चेरुकुरी राजकुमार उर्फ़ आज़ाद सुरक्षित हैं. तीन दिन पहले ही उसने यह आरोप लगाया था कि आज़ाद को आंध्र प्रदेश पुलिस के ख़ुफ़िया विभाग ने पकड़ लिया है और उनकी जान को गंभीर ख़तरा है. सीपीआई माओवादी की दंडकाराण्य स्पेशल ज़ोन समिति के प्रवक्ता गुड्सा उसेंडी ने सोमवार की शाम बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि उन्हें भरोसेमंद सूत्रों से यह सूचना मिल गई है कि आज़ाद सुरक्षित हैं. उन्होंने बताया, "असल में आज़ाद की जो चिट्ठी मुझे कुछ दिन पहले ही मिल जाना चाहिए थी वो कल रात मिली और उसी से इस बात की पुष्टि हुई कि वो सुरक्षित हैं और पुलिस ने उन्हें नहीं पकड़ा है. कामरेड अप्पा राव और कोंडल रेड्डी के मार जाने के बाद जो हालात उत्पन्न हुए थे उसमें हमारी यह आशंका स्वाभाविक थी कि आज़ाद को भी पुलिस ने पकड़ कर मार दिया होगा या मरने वाली होगी. इसलिए हमें पहले उस तरह का वक्तव्य देना पड़ा. इसका हमें खेद है कि हमारे कारण मीडिया को और कुछ बुद्धिजीवियों को कष्ट उठाना पड़ा." आज़ाद ने अपने पत्र में सूचित किया है कि जैसे ही उन्हें शकामुरी अप्पा राव के मारे जाने की सूचना मिली, उन्होंने अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए और वो एक सुरक्षित जगह चले गए. पहले उनकी योजना 12 मार्च को अप्पा राव से मिलने की थी.

आशंका

आज़ाद ने यह भी बताया है कि अप्पा राव को 10 मार्च को चेन्नई में पुलिस ने पकड़ा जहाँ वो कुछ समय से एक ठिकाने पर रह रहे थे.

गुड्स उसेंडी के अनुसार अप्पा राव उस दिन सुबह 8.30 बजे ठिकाने से निकले और फिर नहीं लौटे.

उन्होंने बताया, "हम यह समझते हैं कि आंध्र पुलिस ने उन्हें उसी दिन पकड़ लिया और जानकारी लेने के लिए उन्हें यातनाएँ देने के बाद 12 मार्च को गोली मार दी." ये बात सीपीआई माओवादी के उस पहले वक्तव्य से उलट है जिसमें उसने कहा था कि अप्पा राव और कोंडल रेड्डी को आंध्र पुलिस ने महाराष्ट्र में पकड़ा था और बाद में इन दोनों को अलग-अलग जगह ले जाकर गोली मार दी गई.

आज़ाद के पत्र से यह बात भी सामने आई है कि अप्पा राव और कोंडल रेड्डी के मारे जाने का आपस में कोई संबंध नहीं था और दोनों को बिल्कुल अलग-अलग पकड़ा गया लेकिन दोनों को एक ही दिन मारना एक संयोजित कार्रवाई थी.

यहाँ यह बात उल्लेखनीय है कि सीपीआई माओवादी के आरोप के बाद आंध्र प्रदेश पुलिस के महानिदेशक गिरीश कुमार ने इस बात का खंडन किया था कि आज़ाद उनकी हिरासत में है. आज़ाद की माँ ने भी आंध्र प्रदेश मानवाधिकार आयोग का दरवाज़ा खटखटाया था और मांग की थी कि आज़ाद को अदालत में पेश किया जाए.

इस पर आयोग ने पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया था कि वो इस मामले में एक रिपोर्ट अदालत में पेश करें.

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