गूजर नेताओ का आंदोलन फिर शुरू

गुजर आंदोलन
Image caption पिछले दो सालों में गुजरों ने कई बार हिंसक आंदोलन किए हैं.

राजस्थान में गूजर नेताओं ने फिर से आंदोलन शुरू कर दिया है.नेताओं ने 25 मार्च को अपनी मांग को लेकर जयपुर कूच करने के चेतावनी दी है.

समुदाय के लोगों ने दौसा ज़िले के ग़ाजीपुर गावं में मंगलवार से महापड़ाव का आग़ाज़ किया.

गूजर नेताओं ने अजमेर ज़िले के पुष्कर में 26 मार्च से आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया था. लेकिन गूजरों ने तीन दिन पहले ग़ाजीपुर से आंदोलन की शुरुआत कर दी है.

गूजर अपनी बिरादरी के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण मांग रहे है.

ग़ौरतलब है कि पिछले दो साल से गूजर आरक्षण की माँग को लेकर आंदोलन चला रहे हैं. जिनमें कई लोगों को अपनी जानें गंवानी पड़ी हैं. आंदोलन के दौरान मीणा और गुजर समुदायों के बीच तल्ख़ी आ गई.

इस बीच मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को गुजरों के आंदोलन की जानकारी मिलते ही अपने अधिकारियों के साथ बैठक की और क़ानून व्यवस्था की समीक्षा की.

आरक्षण की मांग

राजस्थान में लंबे हिंसक आंदोलन के बाद सरकार ने गूजर और कुछ अन्य जातियों को सरकारी नौकरियो में पांच प्रतिशत आरक्षण देने का कानूनी प्रावधान किया था. लेकिन पिछले दिनों राजस्थान हाईकोर्ट ने उस पर रोक लगा दी.

इस मामले में अभी अंतिम फैसला होना बाक़ी है.

इस बीच सरकार ने भर्ती प्रक्रिया शुरू की तो गुजर नेताओं ने उनका विरोध किया. उनका आग्रह था कि जब तक गूजरों के लिए आरक्षण का विवाद हल नहीं होता, तब तक भर्ती को स्थिगत रखा जाए.

लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई. सरकार का कहना था कि इसके लिए बाक़ी वर्गों के बेरोज़गारों को वंचित रखना उचित नहीं होगा.

गूजर नेता डॉक्टर रूप सिंह का कहना है “हमारे साथ न भातीय जनता पार्टी और न ही कांग्रेस ने न्याय किया है. हम चाहते है कि सरकार फ़िलहाल शुरू की गई भर्ती पर रोक लगाए. हम सरकार को दो दिन का समय देते है. उसके बाद जयपुर प्रस्थान करेंगे.”

दौसा का ग़ाजीपुर उस राष्ट्रीय राजमार्ग के क़रीब है जो जयपुर को आगरा से जोड़ता है. साथ ही पाटोली गांव भी नजदीक ही है, जो पिछले गुजर आंदोलन की धुरी रहा है.

भाजपा के पूर्व विधायक और गुजर नेता प्रह्लाद गुंजल इस आंदोलन से सहमत नहीं है. उनको लगता है इसके पीछे राजनीती है.

उनका कहना है, ''हमने पहले भी इसका विरोध किया था क्योंकि ये विरोध क़ानून के अनुसार नहीं है. लेकिन तब हमारी सुनी नहीं गई."

किरोड़ी सिंह बैंसला को पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पार्टी की राष्ट्रीय कर्यसामिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया है. इससे पहले के आंदोलनों का नेतृत्व बैंसला ने ही किया था.

बैंसला भाजपा के टिकेट पर टोंक से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके है. इसी बात को उनके विरोधी मुद्दा बना रहे है. बहराल गंभीर सूखे से निपटने की तैयारी कर रही सरकार का अब पूरा ध्यान इस आंदोलन पर केंद्र्त हो गया है.

संबंधित समाचार