बातचीत हुई, पर आगे मिलना तय नहीं

गुजर आंदोलन
Image caption पिछले दो सालों में गुजरों ने कई बार हिंसक आंदोलन किए हैं.

राजस्थान में आंदोलनरत गूजरों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच पहले दौर की बात बातचीत समाप्त हो गई है और दोनों पक्षों ने संतोष जताया है लेकिन ये तय नहीं हो सका है कि वो आगे कब मिलेंगे.

पहले दौर की बातचीत के लिए गूजरों की ओर से 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपूर आया था, वहीं सरकार की ओर से तीन मंत्री बातचीत में शामिल थे.

बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने मीडिया से कहा कि वार्ता सकारात्मक रही है और वो इसकी समीक्षा करेंगे.

गूजर नेताओं ने कहा, "अब तक की बातचीत संतोष जनक रही है और इसके बारे में अपने नेता किरोड़ी सिंह बैंसला को बताएंगे और उसके बाद ही आगे की रणनीति पर कोई फ़ैसला किया जा सकता है."

उधर सरकार की ओर से वार्ता में शामिल नेताओं का कहना था कि जो भी विचार हुआ है उसके बारे में मुख्यमंत्री को अवगत करा देंगे ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके.

बैंसला का विरोध

इससे पहले आंदोलनरत गूजरों ने कहा था कि अगर बातचीत सकारात्कम रही तो आगे की बातचीत में किरोड़ी सिंह बैंसला भी शामिल होंगे और अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो वे 26 मार्च को जयपुर कूच करेंगे.

इस बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को गूजर आंदोलन के दौरान जन-धन की हिफ़ाजत के पुख्ता उपाय करने को कहा है.

Image caption पिछले वर्षों में गूजर आंदोलन के दौरान क़रीब 70 लोगों की जानें गई हैं

गूजर नेताओं ने 23 मार्च से आरक्षण की अपनी मांग को लेकर फिर से आंदोलन शुरू कर दिया है.

इस बीच गूजर नेताओं के एक बड़े वर्ग ने पहली बार बैंसला का विरोध करना शुरु कर दिया है.

गुरुवार को गूजर समाज के लोगों ने जयपुर में शांति मार्च निकाला और आंदोलन के मौजूदा नेता, किरोड़ी सिंह बैंसला पर अपने राजनितिक हितों के लिए बिरादरी को इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया.

इन नेताओ में न केवल सतारूढ़ कांग्रेस पार्टी के गूजर नेता हैं, बल्कि उस भाजपा के भी हैं जिसने हाल में बैंसला को अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नामित किया है.

इन गूजर नेताओं ने एक गूजर विधायक, रामस्वरूप कसना के नेतृत्व में एक शांति मार्च निकाला, अमन की बातें कीं और कहा कि समाज शांति चाहता है, अब हिंसा नहीं होनी चाहिए. हाथों में अमन का पैगाम लिखी तख्तियां थी और हर चेहरे पर चिंता का भाव भी.

बैंसला के निकट सहयोगी डॉक्टर रूप सिंह बैंसला पर लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद बताते है. उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप व्यक्तिगत रंजिश के चलते लगाए जा रहे हैं.

इस बीच राज्य सरकार ने अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर उन योजनाओं को जनता के सामने रखा है जो गूजर बिरादरी के कल्याण के लिए बनाई गई हैं.

राजस्थान ने हाल के वर्षो में दो बड़े गूजर आंदोलन देखे हैं. इनमें कोई 70 लोग मारे गए थे और बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया इसीलिए आंदोलन की फिर दस्तक सुनाई देते ही लोग चिंतित होने लगे हैं.

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