दुबे हत्याकांड में तीन को उम्र क़ैद

सत्येंद्र दुबे
Image caption सत्येंद्र दुबे ने भ्रष्टाचार की लिखित शिकायत सीधे प्रधानमंत्री से की थी

बिहार में 2003 में स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में भ्रष्टाचार तंत्र का भंडाफोड़ करने वाले इंजीनियर सत्येंद्र दुबे की हत्या के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने शनिवार को तीन लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.

सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह ने मंटू कुमार, उदय कुमार और पिंकू रविदास को 31 वर्षीय सत्येंद्र दुबे की हत्या का दोषी माना और उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई.

कानपुर आईआईटी से स्नातक सत्येंद्र दुबे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) में प्रोजेक्ट इंजीनियर थे.

सत्येंद्र दुबे ने बिहार में स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी होने और प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार को उजागर किया था.

लंबा इंतज़ार

27 नवंबर 2003 को सत्येंद्र दुबे जब ट्रेन से वाराणसी से गया लौटने के बाद जब अपने घर जा रहे थे तभी गया में सर्किट हाउस के निकट हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी.

अदालत ने मंटू को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या, धारा 394 के तहत लूट का प्रयास और अवैध हथियार रखने का दोषी पाया. उदय और पिंकू को भी इरादतन हत्या का दोषी पया गया.

अदालत का फ़ैसला सुनने के बाद सत्येंद्र दुबे के भाई धनंजय दुबे ने कहा कि इस फ़ैसले से वे बहुत निराश हैं क्योंकि उनका मानना है कि जिन्हें दोषी ठहराया गया है वे 'पूरी तरह निर्दोष' हैं और असली गुनाहगार अब भी पकड़ से बाहर हैं.

दुबे ने एनएचएआई प्रोजेक्ट में हो रही धांधलियों की लिखित शिकायत तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से भी की थी.

देशभर में व्यापक प्रदर्शनों के बाद सरकार ने 14 दिसंबर 2003 को ये मामला बिहार पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया था. बाद में सीबीआई ने तीन सितंबर 2004 को इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया.

जाँच के दौरान सीबीआई ने गया ज़िले के कटारी गांव के चार लोगों मंटू, उदय, पिंकू और श्रवण कुमार को गिरफ़्तार किया था.

सीबीआई ने दिल्ली में एक बयान जारी किया था, जिसके अनुसार, "ये चारों 26/27 नवंबर की रात गया के सर्किट हाउस के निकट इकट्ठा हुए. 27 नवंबर की सुबह साढ़े तीन बजे जब दुबे रिक्शा पर बैठकर सर्किट हाउस के पास से गुजर रहे थे, तभी इन चारों ने उन्हें लूट लिया. इसी दौरान दुबे के साथ हुई छीना झपटी में मंटू ने देशी तमंचे से गोली मारकर दुबे की हत्या कर दी."

जांच के दौरान सीबीआई को एक कुएं से दुबे का ब्रीफकेस मिला जिसमें दुबे के कुछ दस्तावेज़ और पहचान पत्र थे

जाँच एजेंसी का कहना है कि श्रवण कुमार ने अपनी इच्छा से घटना के बारे में पूरी जानकारी दी और उन्हें सरकारी गवाह बना दिया गया.

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