नई सड़क ने डाला हाशिए पर

उजड़ी हुई दुकान

रामस्वरुप साव चालीस साल तक रा़ष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक दो पर एक दुकान के मालिक थे. वे अपने जीवन से संतुष्ट थे.

फिर एक दिन घोषणा हुई कि पुराने जीटी रोड को अब चौड़ा करके फ़ोर लेन बनाया जाएगा. बिना कुछ समझे और लोगों की तरह वे भी ख़ुश हुए.

लेकिन सड़क का निर्माण शुरु हुआ तो रामस्वरूप साव सड़क पर दुकान के मालिक से एकाएक पीछे एक दुकान के किराएदार हो गए.

सड़क बनने के बाद अब उनकी कमाई आधी रह गई है. वे सब्ज़ियाँ बेचा करते थे.

हज़ारीबाग ज़िले के चौपारण चौराहे पर सड़क के दोनों ओर बसा एक गाँव है. जो शिकायत रामस्वरूप साव की है वही यहाँ के 42 दुकानदारों की है.

विष्णु प्रसाद साव भी सब्ज़ी बेचते हैं. वे बताते हैं कि जब सड़क का निर्माण शुरु हुआ तो अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि दुकाने तोड़ी जा रही हैं लेकिन बाद में एक नया बाज़ार बना दिया जाएगा.

दूसरे दुकानदार का भी आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें कुछ कागज़ भी दिए थे लेकिन कुछ किया नहीं.

हाइवे हिंदुस्तान की टीम के पास यात्रा के दौरान इस बात के लिए कोई अवसर नहीं था कि उन अधिकारियों से यह पूछा जा सकता कि दुकानदारों की शिकायतों पर उनका पक्ष क्या है.

हो सकता है कि सड़क के किनारे की ये दुकानें अवैध कब्ज़ा रही हों.

लेकिन एक बात तय है कि नई सड़क ने पुराने दुकानदारों की मुसीबतें बढ़ा दीं.

परेशानी बढ़ी

यह मुसीबत सिर्फ़ इस बात की नहीं है कि दुकानदारों को अपनी जगह से हटना पड़ा.

वहाँ दिखता है कि अधिकांश दुकानदारों ने फिर नई जगह पर झोपड़ियाँ बना ली हैं और उसमें दुकान चलाने की कोशिश कर रहे हैं.

कुछ लोगों की दुकाने नहीं उजड़ीं लेकिन नई सड़क इतनी ऊँची बनी कि उनकी दुकानें 10-12 फुट नीचे दिखने लगीं.

लोकनाथ यादव बताते हैं कि उन्होंने 1989 में जिस जगह से होटल शुरु किया था वहीं अब भी होटल है लेकिन इसे सड़क पर बनाए रखने के लिए उन्हें 12 फुट मिट्टी पाटनी पड़ी.

लेकिन अब मुसीबत यह है कि उनकी दुकान फिर भी नहीं चल रही है.

वे कहते हैं कि नई सड़क बनने के बाद दुकानदारी इतनी कम हो गई है कि मुश्किल से गुज़ारा हो पाता है.

उसकी वजह से कई दुकानदार अब मज़दूरी करने लगे हैं, कुछ कोलकाता, मुंबई चले गए और कुछ खेती में फिर से क़िस्मत आजमाने चले गए.

Image caption लोकनाथ यादव कहते हैं कि उनकी कमाई आधी रह गई है

वे कहते हैं, “सड़कें बनाने के लिए यहाँ आसपास की छाँह देने वाले पेड़ों को काट दिया गया. सड़क में आना जाना दो हिस्सों में बँट गया इससे यहाँ ठहराव ख़त्म हो गया.”

उनकी एक और शिकायत है कि इन चौड़ी तेज़ रफ़्तार सड़कों से दुर्घटनाएँ भी बढ़ गई हैं जिसकी वजह से लोग अब सड़क पार करके कम ही आर-पार जाते हैं.

जूता पॉलिश करने वाले कृपाल रविदास भी इसी तरह की शिकायत कहते हैं, “अब बच्चों को तो बाज़ार भेजना ही बंद कर दिया गया है. पहले वे आते थे और घर के कई लोगों के जूते सुधरवाकर पॉलिश करके ले जाया करते थे.”

लोकनाथ यादव कहते हैं कि उन्होंने नई सड़क बनने के बाद से चौपारण के चौराहे पर कम से कम दस दुर्घटनाएँ देखी हैं जिसमें से चार की तो घटनास्थल पर ही मौत हो गई.

वे बताते हैं कि ये सभी दुर्घटनाएँ सड़क पार करते हुए हुईं.

विष्णु प्रसाद साव कहते हैं कि दुकानदार और गाँव वाले यहाँ पर ओवरब्रिज बनवाने की माँग कर रहे हैं लेकिन अफ़सर सुन ही नहीं रहे हैं.

हो सकता है नई सड़कों ने कुछ लोगों को बहुत फ़ायदा पहुँचाया हो, लेकिन इन व्यापारियों की तरह के लोग भी बहुत हैं जो इस नई सड़क की वजह से हाशिए पर चले गए हैं.

वे ख़ुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

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