नलिनी नहीं होंगी रिहा

नलिनी श्रीहरन (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption नलिनी राजीव गांधी हत्याकांड के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा भुगत रही हैं.

तमिलनाडु की सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई नलिनी श्रीहरन की समय से पहले रिहाई की अपील को ठुकरा दिया है.

नलिनी की रिहाई के मामले में राज्य सरकार ने जेल सलाहकार बोर्ड से सलाह मांगी थी और बोर्ड ने नलिनी को समय से पहले रिहा नहीं करने की सिफ़ारिश की थी.

जेल सलहाकार बोर्ड ने नलिनी की रिहाई को नामंज़ूर करने के आठ कारण गिनाए हैं. राज्य सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश पर नलिनी की रिहाई के मामले में जेल सलाहकार बोर्ड से सलाह मांगी थीं.

नलिनी ने समय पूर्व रिहाई को लेकर मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दाख़िल कर रखी है.

उनका कहना है कि उन्हें जल्द रिहा कर दिया जाए, क्योंकि उनकी सेहत ठीक नहीं है और वो मरने से पहले अपने जीवन का कुछ समय अपनी बेटी के साथ बीताना चाहती हैं.

मौत, आजीवन क़ैद और अब रिहाई की मांग

नलिनी इस समय राजीव गांधी हत्याकांड के मामले में वेल्लोर जेल में आजीवन कारावास की सज़ा भुगत रही हैं और पिलछे 19 साल से जेल में है.

राजीव गांधी हत्याकांड के मामले में नलिनी को पहले मौत की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में इसे आजीवन कारावास में बदल दिया गया.

पिछले साल सितंबर में अपनी रिहाई की मांग करते हुए नलिनी ने भूख हड़ताल भी की थी.

इससे पहले वर्ष 2007 में भी नलिनी ने अपनी रिहाई की मांग की थी, लेकिन उस समय भी जेल सलाहकार बोर्ड ने उसे नामंज़ूर कर दिया था.

नलिनी की रिहाई के मामले ने उस समय और ज़ोर पकड़ा जब राजीव गांधी की बेटी प्रियंका गांधी ने गुप्त रूप से नलिनी से मुलाक़ात की और बाद में मीडिया से कहा कि उन्होंने नलिनी को माफ़ कर दिया है.

21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बदूर में राजीव गांधी की आत्मघाती बम हमले में हत्या कर दी गई थी. उसी साल नलिनी को गिरफ़्तार किया गया था. वर्ष 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने नलिनी को मौत की सज़ा सुनाई.

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