अश्व शक्ति नहीं गधा शक्ति कहिए

गधा
Image caption सामान ढोने के लिए सदियों के गधे का उपयोग होता रहा है.

जी तोड़ मेहनत के बाद भी ताने सुन-सुन कर आजिज़ आ चुके अब गधे भी शान से सर उठाकर चल सकेंगे.

इसकी वजह ये है कि राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र गधे का इस्तेमाल कर बिजली पैदा करने के प्रयोग में सफल हो गया है.

वैज्ञानिक कहते है कि दो गधों से एक तय समय तक काम में लेने से इतनी बिजली पैदा हो सकती है जिससे चौदह वॉट के 19 सीफएल बल्ब लागातार छह घंटे तक रोशनी दे सकते है.

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र बीकानेर के वैज्ञानिक पिछले काफ़ी समय से इस विषय पर प्रयोग कर रहे थे. इस केंद्र के एक वैज्ञानिक डॉक्टर एसएन टंडन ने बीबीसी को बताया कि प्रायोगिक तौर पर गधों से बिजली पैदा करने का काम सफल रहा है.

डॉक्टर एसएन टंडन का कहना है, “हमें लगा कि क्यों नहीं गधे का बिजली उत्पादन के काम में इस्तेमाल किया जाए, प्रयोग किया तो कामयाब रहा. अब हम उपकरण स्थापित कर इस काम को ठीक से शुरू कर रहे है. ये उन ग्रामीण इलाको के लिए निर्णायाक साबित हो सकता जो बिजली की किल्लत झेल रहे हैं”

वैज्ञानिक बताते है कि गधे को गोलाकार पथ पर घुमाया गया जैसे कि कोल्हू में बैल को घुमाते हैं ताकि वो बिजली पैदा कर सके. इसके लिए एक पॉवर जनरेटिंग मशीन और बैट्री का उपयोग किया गया. बिजली पैदा हुई और उर्जा संचारित कर बैटरियों को चार्ज कर दिया.

शुरुआती दौर में ये उर्जा घरेलू ज़रूरतों के लिए बहुत ही मददगार साबित होगी. वैज्ञानिक कहते हैं कि एक गधा एक जनरेटिंग मशीन पर छह घंटा काम कर सकता है.

वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर ये प्रयोग के आगे भी सही नतीजा देता रहा तो इसे और आगे बढ़ाया जाएगा. इससे गधों की उपयोगिता बढ़ेगी और शायद कदर भी होने लगेगी. केंद्र के वैज्ञानिक अब अच्छी किस्म के देसी गधों को खोज रहे हैं, जो बिजली पैदा कर अपनी नस्ल का नाम रोशन करे.

जब भाप का इंजन आया था तो उसकी ताकत नापने के लिए ‘अश्व शक्ति’ का पैमाना इजाद किया गया, अब गधे बिजली पैदा करेंगे तो पैमाना शायद 'गर्दभ शक्ति' हो जाए.

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