भारत की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद शुरु

चंद्रमौली
Image caption इस बार कई नई जानकारियां मिलने की उम्मीद है.

भारत में हर दस साल पर एक बार होने वाली जनगणना की प्रक्रिया गुरुवार से शुरु हो रही है.

औपचारिक तौर पर इसकी शुरुआत राष्ट्रपति से होगी. भारत की आज़ादी के बाद ये जनगणना सातवीं बार हो रही है.

इस जनगणना में भारत के 35 राज्य और केंद्र शाषित प्रदेश, 640 ज़िले,1 अरब 20 करोड़ की आबादी और क़रीब 24 करोड़ घर शामिल होंगे.

इस जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होनी है.पहला चरण इस वर्ष यानि 2010 में अप्रैल से सितंबर के बीच संपन्न होगा जबकि दूसरा चरण अगले साल यानि 2011 में 9 फ़रवरी से 28 फ़रवरी के बीच पूरा होगा.

इस बार पहली बार देश के सभी नागरिकों का व्यापक डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा. साथ ही इस बार राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर (एनपीआर) भी तैयार किया जाएगा.

कई नई जानकारी

इसी रजिस्टर में इकट्ठा की गयी जानकारी से आनेवाले समय में 15 वर्ष की उम्र से ऊपर के हर भारतीय नागरिक को एक यूनीक आईडेंटिटी नंबर यानि यूआईडी जारी किया जाएगा.

इस रजिस्टर में हर नागरिक की फोटो और उसकी दसों उँगलियों की छाप (बायोमेट्रिक) भी दर्ज होगी.

इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 6 हज़ार करोड़ रुपए खर्च होंगे.

ये पहला मौका होगा जबकि जनगणना कर रहे अफसर देशवासियों से आधुनिक युग के संसाधनों के बारे में भी उनसे जानकारी इकट्ठा करेंगे--मसलन उनके पास कौन सी और कितनी गाड़ियां हैं, वो कौन सा मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करते हैं,कितने कंप्यूटर और इन्टरनेट कनेक्शन हैं, वगैरह वगैरह.

इस जनगणना में जाति पर आधारित कोई भी जानकारी नहीं मांगी जाएगी लेकिन धर्म, भाषा,शिक्षा और पेशे संबंधी जानकारी ज़रूर इकट्ठा की जाएगी.

जनगणना के वक्त इकट्ठा की गई जानकारी को किसी भी अदालत में पेश नहीं किया जा सकता. ये प्रावधान इसलिए रखा गया है कि देश का हर नागरिक निडर निर्भीक होकर अपने विषय में हर तरह की जानकारी दे सके.

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