शिक्षा हर बच्चे का अधिकार: मनमोहन

बेसहारा बच्चा
Image caption भारत में लाखों बच्चे शिक्षा से वंचित हैं

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शिक्षा का अधिकार क़ानून गुरुवार से लागू होने पर देश को संबोधित किया और कहा कि शिक्षा बच्चों का हक़ है.

मनमोहन सिंह ने इसे ऐतिहासिक क़ानून बताया और कहा कि ये क़ानून देश के बच्चों को समर्पित है.

प्रधानमंत्री का कहना था कि नौजवान हमारे देश का भविष्य हैं और उन्हीं पर खुशहाल और मजबूत भारत निर्भर है.

उनका कहना था कि सरकार ने इस क़ानून को लागू कर अपने वादे को पूरा किया है और ये दिखाता है कि हम बच्चों के भविष्य को कितनी अहमियत देते हैं.

मनमोहन सिंह ने कहा कि इस क़ानून को लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना है.

साथ ही उनका कहना था कि बच्चों के परिवारों पर भी इसे सफल बनाने की अहम ज़िम्मेदारी है.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षकों को सम्मान दिया जाना ज़रूरी है.

मनमोहन सिंह ने अपना उदाहरण देते हुए कहा,''मैं जो कुछ भी हूँ, वो शिक्षा की बदौलत हूँ. मैं चाहता हूँ कि शिक्षा की रोशनी सभी के पास पहुँचे.''

मुफ़्त शिक्षा

ग़ौरतलब है कि भारत में ऐतिहासिक शिक्षा का अधिकार क़ानून गुरुवार से लागू हो गया है. इसके तहत आठवीं कक्षा तक मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है.

अनिवार्य शिक्षा अधिकार विधेयक पिछले साल संसद से पारित हो गया था और इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल चुकी है.

इसके तहत छह से चौदह साल तक के सभी बच्चों को शिक्षा मुहैया कराना संवैधानिक अधिकार बना दिया गया है.

इससे भारत के आठ करोड़ से ज़्यादा बच्चों को फायदा होने की उम्मीद है और यह प्राथमिक शिक्षा के प्रसार में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

इस क़ानून में शिक्षा की गुणवत्ता, सामाजिक दायित्व, निजी स्कूलों में आरक्षण और स्कूलों में बच्चों के प्रवेश को नौकरशाही से मुक्त कराने का प्रावधान भी शामिल है.

इस क़ानून के लागू होने के बाद अगर किसी बच्चे को शिक्षा का अवसर नहीं मिलता है, तो इसे सुनिश्चित करना सरकार की ज़िम्मेदारी होगी.

कोई भी अभिभावक अपने बच्चे को मुफ़्त शिक्षा दिलाने के लिए अदालत तक का दरवाज़ा खटखटा सकता है.

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