'अफ़ग़ान सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षण नहीं'

हामिद करज़ई
Image caption पाकिस्तान का आरोप है कि भारत अफ़ग़ानिस्तान में अपनी दख़ल बढ़ा रहा है

भारत ने अफ़ग़ानिस्तान की सेना और पुलिस को प्रशिक्षण देने की बात से इंकार किया है और कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान के विकास से जुडी़ योजनाओं में अपना योगदान जारी रखेगा.

भारत में वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में एक 'महत्वाकांक्षी' योजना के तहत अक्तूबर 2011 से पहले क़रीब तीन लाख सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाना है, लेकिन उसमें भारत शामिल नहीं होना चाहता.

अधिकारिक सूत्रों का कहना है, "भारत को न तो इस योजना में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया गया है और न ही भारत उसमें शामिल होने की इच्छा रखता है."

पिछले 50 साल में भारत ने अफ़ग़ानिस्तान और दूसरे देशों के सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षण दिया है और वो अब भी जारी रहेगा.

पाकिस्तान का दावा

हालांकि पाकिस्तान का दावा है कि भारत, अफ़ग़ानिस्तान में अपने सैन्य प्रशिक्षण और अन्य सामरिक सुविधाओं को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

इस समय अफ़ग़ानिस्तान में भारत के साढ़े तीन हज़ार से चार हज़ार कर्मचारी हैं जो विभिन्न मानवीय योजनाओं से जुड़े हुए हैं. इसके अलावा काफ़ी भारतीय निजी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जिनकी सही तादाद भारत के पास नहीं है.

अफ़ग़ानिस्तान में कुछ अर्धसैनिक सुरक्षाबल भी तैनात हैं. इंडो तिब्बत सीमा पुलिस बल के क़रीब दो सौ सुरक्षाकर्मी भारतीय दूतावास और चार वाणिज्यिक दूतावास पर लगाए गए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में तैनात भारतीय सुरक्षाकर्मियों की वापसी के सवाल पर अधिकारी का कहना है, "भारत अफ़ग़ानिस्तान में शांति और विकास के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसी स्थिति में भारत अपने कर्मियों को वापस नहीं बुला रहा है."

हालांकि 26 फ़रवरी को भारतीय हितों पर हुए हमले के बाद भारतीय मेडिकल टीम को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था लेकिन भारत इस मिशन को दोबारा शुरु करने जा रहा है, क्योंकि ये मिशन अफ़ग़ानिस्तान में काफ़ी कामयाब रहा है. भारतीय मेडिकल मिशन ने अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब तीन लाख से अधिक मरीज़ों का इलाज किया है.

सभी तालेबान बुरे

सरकारी अधिकारी का कहना था कि भारत चाहता है कि तालेबान दोबारा सत्ता में नहीं आए.

उनका कहना था, " पूर्व में तालेबान का बढ़ना भारत के लिए विध्वंसक रहा है इसलिए अब भी भारत नहीं चाहता कि तालेबान की शक्ति बढ़े."

अफ़ग़ानिस्तान सरकार की गुलबुदीन हिकमतयार गुट से बातचीत पर भारत का रुख़ स्पष्ट करते हुए अधिकारी ने कहा कि भारत तालेबान से किसी वार्ता में शामिल नहीं है और ना ही शामिल होने की इच्छा रखता है.

अधिकारी के अनुसार भारत के लिए सभी तालेबान बुरे हैं.

उनका कहना था, "अगर अफ़ग़ानिस्तान की सरकार तालेबान से बातचीत करती है तो भारत इस बात की निगरानी रखेगा कि क्या उसमें लंदन सम्मेलन के निर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं और अगर उन निर्देशों का पालन नहीं किया जाएगा तो भारत इसपर आवाज़ उठाएगा."

उनका कहना यह भी कहना था कि हिज़्ब-ए-इस्लामी से किसी समझतौ पर अफ़ग़ानिस्तान की सकार को सवधानी रखनी चाहिए क्योंकि अतीत में हिज़्ब-ए-इस्लामी के तालेबान से अच्छे संबंध रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई का 'पाकिस्तान को जुड़वां भाई' कहना जबकि 'भारत को दोस्त' बताने पर अधिकारी का कहना था, " क़रीबी दोस्त पराया जुड़वा भाई से अच्छा होता है."

जबकि अफ़ग़ानिस्तान से संबंधित अमरीकी नीति जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों को बढ़वा देने की नीति अपनाई गई है उसपर अधिकारी का कहना है कि जहां तक तालेबान पर नियंत्रण का मामला है भारत को इस मामले में कुछ भी नहीं कहना है.

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