माओवादी कायर हैं- चिदंबरम

चिदंबरम (फ़ाइल फोटो)
Image caption लालगढ़ की यह यात्रा माओवादी नेता किशन जी के घायल होने या मारे जाने के अपुष्ट खबरों के बीच हो रही है

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने माओवादियों को डरपोक क़रार दिया और कहा कि अगर वो विकास चाहते हैं तो उन्हें जंगलों से निकल कर बातचीत करनी चाहिए.

माओवादियों के ख़िलाफ़ हो रही कार्रवाईयों की समीक्षा करने लालगढ़ पहुंचे गृहमंत्री ने कहा, ‘‘नक्सली कायर हैं. वो क्यों जंगलों में छुपे हुए हैं.’’

चिदंबरम ने लालगढ़ के आसपास के इलाक़ों से केंद्रीय सुरक्षा बलों को वापस ले जाने की संभावना से इंकार कर दिया.

उन्होंने कहा कि वो इलाक़े के लोगों से मिले हैं और फिलहाल सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की कोई मंशा नहीं है.

चिदंबरम की यात्रा से पहले इलाक़े में माओवादी समर्थक आदिवासियों के एक संगठन ने बंद का आह्वान किया है.

चिदंबरम को पश्चिम बंगाल में ही स्थित मंगलकोट की भी यात्रा करनी थी. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक मंगलकोट की उनकी यात्रा रद्द कर दी गई है.

गृह मंत्रालय के मुताबिक ईटानगर से वापस लौटने में हुई देरी की वजह से यह यात्रा रद्द हुई है.

कार्रवाई की रूपरेखा

वहीं यूपीए में सहयोगी पार्टी तृण मूल कांग्रेस ने नक्सल विरोधी कार्रवाइयों पर सरकार से नाराजगी भी दिखाई.

तृण मूल कांग्रेस का आरोप रहा है कि पश्चिम बंगाल में नक्सल विरोधी कार्रवाई के नाम पर मासूम आदिवासियों को बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है.

अभी करीब सात हफ्ते पहले हुई बैठक में गृह मंत्री चिदंबरम ने नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए ऑपरेशन ग्रीन हंट की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया था.

इस बैठक में भारत के पूरब में स्थित चार राज्यों-पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा और झारखंड में नक्सली गतिविधियों पर चर्चा हुई थी.

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