बुरी नज़र वाले

चैन्नई का बॉडीगार्ड मुनिश्वर मंदिर

चेन्नई में एक मंदिर है जिसका नाम है बॉडीगार्ड मुनीश्वर टेंपल. वैसे तो मुंडन हो या कोई मन्नत, लोग यहां आते ही हैं, लेकिन इसकी ख़ासियत है गाड़ियों की पूजा.

सीधे शोरूम से निकली गाड़ी हो या फिर आपने सेकंड-हैंड खरीदी हो, सबकी रक्षा करते हैं बॉडीगार्ड मुनीश्वर.

चेन्नई में मौजूद शायद ही कोई गाड़ी हो जो बॉडीगार्ड की शरण में नहीं लाई जाए. हिंदू मुसलमान, और ईसाई भी आते हैं बॉडीगार्ड मुनीश्वर का आशीर्वाद लेने.

वहां अपनी पहली नई मोटरसाईकल लेकर आए मितेश कहते हैं ये मंदिर गाड़ी और गाड़ी चलानेवाले दोनों ही के लिए शुभ है. “मैं जैन धर्म का हूं, लेकिन फिर भी यहां आता हूं. मेरे पिताजी भी अपनी पहली गाड़ी यहीं लेकर आए थे.”

प्रेम कुमार एक नई टाटा इंडिका लेकर आए हैं जिसे वो टैक्सी के धंधे में लगाएंगे. इसके पहले उन्होंने एक सेकंड-हैंड गाड़ी ली थी और उसकी भी पूजा यहीं कराई थी.

वे कहते हैं, “यहां की ख़ास बात ये है कि अगर आप एक गाड़ी लेकर आते हैं तो बहुत जल्द आपकी किस्मत में दूसरी गाड़ी भी आएगी. मैने तो भगवान को आज बोल दिया है कि अब जल्द ही इनोवा दिलवा दें.”

नींबू

पूजा के दौरान गा़ड़ी के चारों पहियों के नीचे एक नींबू रखा जाता है, नीचे आरती जलाई जाती है और सड़क पर एक नारियल फोड़ा जाता है. फिर गाड़ी नींबूओं को मसलते हुए आगे बढ़ती है.

पूजा करानेवाले तिलकधारी पंडित कहीं नहीं नज़र आते. बल्कि पूजा करवा रहे होते हैं कुछ आम से लोग. कुछ मंत्र भी बुदबुदाते हैं लेकिन जितनी देर मैं खड़ा रहा कोई मंत्र सुन नहीं सका.

एक पुजारी का नाम जब पूछा तो चौंके बिना नहीं रह सका. उनका नाम है मोहम्मद इक़बाल.

उन्होंने बताया कि उन्हें किसी ने इस पूजा की विधि सिखा दी थी और तब से वो पूजा करवा रहे हैं. “मैं यहां आनेवालों को अपना नाम नहीं बताता हूं क्योंकि मुसलमान से वो पूजा नहीं करवाएंगे. मुझे ये काम करना पड़ता है क्योंकि गांव में मेरा परिवार है और एक बच्ची है जिसके लिए पैसा कमाना पड़ता है.”

हर दिन उनकी कमाई 200 से 300 रूपए के आसपास हो जाती है.

चेन्नई में जैसे-जैसे गाड़ियों की संख्या बढ़ी है, नई-नई कंपनियां आई हैं इस मंदिर के बाहर की भीड़ भी बढ़ी है. छुट्टी के दिनों में तो तिल रखने की जगह नहीं बचती. हर मॉडल की गाड़ी यहां नज़र आती है.

ह्यूंडाई, फ़ोर्ड, टोयोटा, टाटा इन सबको अपनी हर गाड़ी की बिक्री से होनेवाले मुनाफ़े का तो पता होता है लेकिन उन्हें शायद ही पता हो कि बिजनेस कुछ और लोगों का भी चमकता है.

गाड़ी से मुनाफ़ा

शांति देवी इस मंदिर के बाहर नींबू, नारियल और मालाएं बेचती हैं, और जितनी ज़्यादा गाड़ियां उतना ज़्यादा मुनाफ़ा.

कहती हैं हर गाड़ी को पांच नींबू की ज़रूरत होती है और दिनभर में वो पचास से साठ नींबू, आठ दस नारियल और बीस पच्चीस मालाएं बेच लेती हैं.

अमरीका के डेट्रॉइट शहर में दुनिया की बड़ी बड़ी कार कंपनियां हैं और कहते हैं कि वहां कार कंपनी की हर एक नौकरी से नौ और नौकरियां जुड़ी होती हैं.

भारत में फ़िलहाल ऐसा सर्वे नहीं हुआ है लेकिन जब भी होगा उसकी तादाद नौ से तो कहीं ज़्यादा होंगी.

लेकिन फ़ायदा कार कंपिनयों का भी है क्योंकि कहते हैं कि अगर आप एक गाड़ी ले आए बॉडीगार्ड मुनीश्वर की शरण में तो दूसरी गाड़ी जल्दी आती है, और दूसरी लाए तो तीसरी भी.

इसलिए यहां सब मिलकर कहते हैं जय बॉडीगार्ड मुनीश्वर की.

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