कर्मचारियों की हड़ताल जारी

कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल
Image caption कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल

जम्मू और कश्मीर में हालांकि अनिवार्य सेवा प्रबंधन क़ानून 'एसमा' को लागू कर दिया गया है कि 'काम नहीं तो पैसा नहीं' फिर भी चार लाख 50 हज़ार से अधिक सरकारी कर्मचारी अपनी हड़ताल पर क़ायम हैं.

ये कर्मचारी छठे वेतन आयोग के तहत बक़ाया राशि की मांग कर रहे हैं. उन्होंने अपनी हड़ताल आगामी 12 अप्रैल तक बढ़ा दी है.

कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी सरकारी दफ़्तर बुरी तरह प्रभावित रहे. ये कर्मचारी रिटायरमेंट की उम्र सीमा में भी वृद्धि की मांग कर रहे हैं.

सरकारी कर्मचारियों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में जुलूस निकाले और सरकार विरोधी नारे लगाए.

सरकारी कर्मचारी यूनियन के नेता राम कुमार शर्मा ने कहा, "हम लोगों ने 12 अप्रैल तक अपनी हड़ताल बढ़ाने का फ़ैसला किया है. हम लोग एसमा के लागू होने से घबराने वाले नहीं हैं."

उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में सरकारी कर्मचारियों ने उनकी मांग के समर्थन में हड़ताल की.

मजबूरी में

राज्य के वित्त मंत्री अब्दुर्रहीम राठर ने संवाददाताओं से सोमवार शाम बात करते हुए कहा था," उन्होंने (हड़तालियों ने) हमें ये क़दम लेने पर मजबूर कर दिया. इसका अर्थ यह कि वे जितने दिन काम पर नहीं जाएंगे उन्हें उनका पैसा नहीं मिलेगा."

मंत्री ने कहा, "सरकार 2500 लाख रुपए कर्मचारियों पर ख़र्च कर रही है. हम इस ख़र्च को व्यर्थ नहीं जाने दे सकते."

जम्मू कश्मीर सरकार ने फ़रवरी 2009 में छठे वेतन आयोग लागू करने की मंज़ूरी दी थी और यह घोषणा की थी कि प्रभावी वेतन उन्हें जुलाई 2009 से दिया जाएगा जबकि उसकी सिफ़ारिश पहली जनवरी 2006 से होगी.

बक़ाया राशि को पांच क़िस्तों में अदा किया जाना था और यह कर्मचारी के प्रॉविडेंट फ़ंड में जाना था.

इस हड़ताल के कारण सरकारी दफ़्तर, स्कूल, अस्पताल, न्यायालय और अन्य ज़रूरी सेवाएं प्रभावित हुई हैं.

वित्त विभाग के सूत्रों ने बताया है कि केंद्र सरकार ने पैसे जारी नहीं किए हैं जिससे कि छठे वेतनमान को लागू किया जा सके और बक़ाया अदा किया जा सके. बक़ाया रक़म 41.2 अरब रूपए है.

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