हमला ऑपरेशन ग्रीनहंट का जवाब: माओवादी

भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा ज़िले में हुए नक्सलवादी हमले में मारे गए सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है.

हमले के बाद बीबीसी से बातचीत में माओवादी नेता गोपालजी ने कहा है कि दंतेवाड़ा का हमला केंद्र सरकार के ऑपरेशन ग्रीनहंट का परिणाम है.

बातचीत में उन्होंने कहा, "हमने कहा था कि ऑपरेशन ग्रीनहंट को वापस लिया जाए लेकिन ऐसा हुआ नहीं. हज़ारों अर्धसैनिक बलों को उतार दिया गया. इसी का परिणाम है दंतेवाड़ा की घटना."

गोपाल जी ने कहा कि उनके काडर पर ऑपरेशन ग्रीनहंट का कोई असर नहीं पड़ा बल्कि वे लोग और सतर्क और सजग हो गए हैं. उन्होंने कहा कि इस अभियान से काडर में नए क्रांतिकारी जोश का संचालन हुआ है और उन्हें ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ लड़ने का समय आ गया है.

जब उनसे पूछा गया कि गृह मंत्री कह चुके हैं कि कुछ सालों में माओवादियों का सफ़ाया कर दिया जाएगा तो गोपालजी बोले, "ये चिदंबरम की सोच हो सकती है, ओबामा की सोच हो सकती है, इटली की राजकुमारी सोनिया की सोच हो सकती है लेकिन ये जनयु्द्ध है,लोगों की लड़ाई है और जनता की लड़ाई को बंदूक से नहीं दबाया जा सकता."

इतने सारे लोगों को मारने के औचित्य पर सवाल उठाया गया तो उन्होंने कहा, "हमारे चारों ओर सैनिकों का घेरा है, आदिवासियों को मारा जा रहा है, जंगलों से भगाया जा रहा है, महिलाओं का सामूहिक बलात्कार किया जा रहा है. ऐसे में हमारे पास क्या विकल्प है."

मसले को बातचीत से हल करने पर गोपालजी ने कहा, "हम तो बातचीत के लिए तैयार हैं. चिदंबरम जी ने कहा कि 72 घंटे के लिए संघर्षविराम करिए. किशनजी ने तो कहा था वो 72 दिन के संघर्षविराम के लिए हैं. हमने कहा था कि ऑपरेशन ग्रीनहंट बंद करें, बातचीत का माहौल बनाए.चिदंबरम जी बातचीत के नाम पर केवल उलझन पैदा करते रहे."

वहीं गृह सचिव जीके पिल्लई ने पत्रकारों को बताया है कि शुरुआती जाँच के मुताबिक नक्सलवादियों ने ऐसी कई जगहों पर प्रेशर बम लगाए थे जहाँ उन्हें लगा कि सुरक्षाकर्मी आएँगे और इसी कारण मृतकों की संख्या इतनी ज़्यादा है.

सात घायलों को जगदलपुर लाया गया है जबकि मारे गए सुरक्षाकर्मियों के शव विशेष विमान से दिल्ली लाए जाएँगे.

गृह सचिव ने कहा कि जिस हेलीकॉप्टर को बचाव कार्य के लिए भेजा गया था वो भी गोलीबारी का शिकार बना.

उन्होंने इस हमले पर अफ़सोस जताते हुए कहा, "माओवादी हत्यारे हैं और हत्याकांड ने ये बात साबित कर दी है. इन लोगों ने पिछले कुछ सालों में कई मासूमों की जान ली है. इस हमले ने सरकार के संकल्प को और मज़बूत किया है और हम मुँहतोड़ जवाब देंगे."

'प्रेशर बम से किया हमला'

जीके पिल्लई ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कई माओवादी नेताओं को पकड़ा जा चुका है और आने वाले दिनों में और भी नेता गिरफ़्त में होंगे.

जब से भारत सरकार ने उन राज्यों में सुरक्षा बलों का अभियान चलाया है जहाँ माओवादी सक्रिय हैं, तब से इसे सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बीबीसी को बताया कि 400 से 500 माओवादी विद्रोहियों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया था.

दंतेवाड़ा ज़िले में सुरक्षाबलों पर तीन स्थानों पर हमले हुए.केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस घटना के बारे में कहा, "छत्तीसगढ़ पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मिलकर माओवादियों के ख़िलाफ़ साझा अभियान तैयार किया था. लेकिन मुझे लगता है कि रणनीति में चूक हो गई और वे माओवादियों के जाल में फँस गए. ये नक्सलियों की क्रूरता दर्शाता है. मुझे इस घटना से काफी दुख हुआ है."

मंगलवार सुबह पाँच बजे केंद्रीय अर्धसैनिक बल यानी सीआरपीएफ़ का दस्ता चिंतलनार थाने के तालमेतला इलाक़े में गश्त के लिए निकला था.

सबसे पहले छह बजे के आस-पास नक्सलियों ने इस दस्ते पर हमला कर दिया.

अचानक हुए इस हमले में जवानों को संभलने का मौका नहीं मिला. इसमें एक सब इंस्पेक्टर और एक जवान की मौत हो गई. चार जवान घायल हो गए.

इस हमले की ख़बर मिलने के बाद एक बचाव दल को भेजा गया. इनके पास बख्तरबंद गाड़ी भी थी.

नक्सलियों ने रास्ते में ही बचाव दल पर हमला कर दिया. इसमें वाहन के चालक और एक जवान की मौत हो गई और पाँच जवान घायल हो गए.

इसके बाद तीसरी पुलिस पार्टी दोनापाल नेशनल हाइवे के रास्ते से घटनास्थल पहुँचने के लिए निकल पड़ी. लेकिन घाटी में जगह-जगह घात लगाकर बैठे माओवादी विद्रोहियों ने इन पर भी हमला कर दिया.

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