हमले की जाँच रिपोर्ट बुधवार को पेश होगी: गृह सचिव

केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम छत्तीसगढ़ गई है और वो दंतेवाड़ा ज़िले में हुए नक्सलवादी हमले की जाँच रिपोर्ट बुधवार को पेश करेगी.

केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा कि इस जाँच रिपोर्ट के आधार पर सरकार अपनी कार्रवाई तय करेगी.

इस दल में केंद्रीय सुरक्षा बल (सीआरपीएफ़) के महानिदेशक और महानिदेशक (ऑपरेशन) शामिल हैं.

पिल्लई का कहना था,''ये दल स्थानीय पुलिस और घायल जवानों से बातचीत करने के बाद बुधवार को अपनी रिपोर्ट पेश करेगा.''

इस रिपोर्ट में सीआरपीएफ़ और स्थानीय पुलिस दल पर हमले की परिस्थितियों और हालात का आकलन किया जाएगा.

गृह सचिव जीएस पिल्लई का कहना था कि निशाना बने सुरक्षाकर्मियों को माओवादियों के बारे में ‘विशेष गुप्तचर सूचना’ मिली थी. इसके आधार पर अर्धसैनिक बल और पुलिस बल के जवान दंतेवाड़ा के जंगलों में गए थे.

सीआरपीएफ़ की 62वीं बटालियन को जंगल की लड़ाई का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और वे इन जंगलों में पिछले कुछ समय से नक्सलवादियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाते रहे हैं.

हालांकि जीएस पिल्लई इस बात को स्वीकार करने से इनकार करते हैं कि ये गुप्तचर व्यवस्था और अभियान की विफलता है.

उनका कहना था,''वे दो दिन बाद लौट रहे थे और थके हुए होंगे और मुझे लगता है कि उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर थोड़ी लापरवाही बरती.''

पिल्लई का कहना था कि वो निश्चित रूप से थोड़े असावधान थे, अन्यथा वे सभी लोग नहीं मारे गए होते.

गृह सचिव का कहना था,''दंतेवाड़ा कभी हमारा प्राथमिकता वाला क्षेत्र नहीं रहा है. राजनंदगाँव और कांकेर दो ज़िले हैं जहाँ अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है. यहाँ हमने नागरिक प्रशासन बहाल किया है और हमारा ध्यान इन्हीं क्षेत्रों पर है.''

उनका कहना था कि दंतेवाड़ा कभी हमारा प्रभुत्ववाला क्षेत्र नहीं रहा है. गश्त पर गया ये दल अपने प्रभुत्ववाले इलाक़े से बाहर चला गया और निशाना बन गया.

गृह सचिव जीएस पिल्लई का कहना था कि रिपोर्ट आने के बाद बुधवार को तस्वीर साफ़ हो पाएगी.

उन्होंने जानकारी कि मंगलवार देर शाम तक 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है.

ग़ौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में हुए नक्सलवादी हमले में 75 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं.

जब से भारत सरकार ने उन राज्यों में सुरक्षा बलों का अभियान चलाया है जहाँ माओवादी सक्रिय हैं, तब से इसे सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बीबीसी को बताया कि 400 से 500 माओवादी विद्रोहियों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया था.

केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस घटना के बारे में कहा, "छत्तीसगढ़ पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मिलकर माओवादियों के ख़िलाफ़ साझा अभियान तैयार किया था. लेकिन मुझे लगता है कि रणनीति में चूक हो गई और वे माओवादियों के जाल में फँस गए. ये नक्सलियों की क्रूरता दर्शाता है."

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