...ताकि कोई भाई बहन का क़त्ल न करे

खाप पंचायत
Image caption हरियाणा में खाप पंचायतें परंपराओं का उल्लंघन करने वालों को सज़ा सुनाती हैं

'प्यार दीवाना होता है. इस थीम पर न जाने कितना साहित्य लिख दिया गया. शेक्सपीयर से ग़ालिब, शाहरूख़ खां से जावेद अख़्तर तक हर किसी ने प्यार की दीवानगी के गुण गाए, कविताएं लिखीं, फ़िल्मी पटकथाओं पर दीवानगी का चित्रण किया और न जाने कितने फ़िल्मी गीत प्यार पर न्योछावर हो गए. लेकिन प्यार की दीवानगी है कि थमने का नाम ही नहीं लेती. आए दिन नौजवान बच्चे प्यार की दीवानगी पर न्योछावर होने को तैयार रहते हैं.

प्यार की दीवानगी को रोकने का भी एक जुनून होता है. अगर 'मुगल-ए-आज़म' में एक तरफ़ अनारकली सलीम के प्यार में दीवानी होकर भरे दरबार में 'जब प्यार किया तो डरना क्या' गा कर अपने प्यार की दीवानगी का ऐलान करती है तो दूसरी ओर 'अनार कली' के प्यार को ज़िंदा दीवार में चिनवा दिया जाता है.

ख़ैर, अक़बर बादशाह का समय तो मध्य कालीन दौर था. उस समय किसी को कही भी प्यार की दीवानगी की इजाज़त नहीं थी. पर अब तो हम 21वीं शताब्दी में रहते हैं. आज प्यार की दीवानगी पर कोई रोक-टोक नहीं. नौजवान बच्चे अब प्यार में डूब कर आए दिन घरवालो की मर्जी के विरुद्ध शादी ब्याह कर रहे है. और समाज हंसी- ख़ुशी बच्चों के प्यार को मान्यता दे रहा है.

'नाक कटने' का डर

लेकिन हरियाणा में आज भी प्यार की दीवानगी को मन्यता प्राप्त नहीं हो पाई है. अभी चंद दिन पहले दिल्ली के समाचार पत्रों में दिल्ली महानगरी से सटे सोनीपत से यह समाचार छपा कि एक भाई ने अपनी सगी बहन को इसलिए मार दिया की वह अपने ही गांव के किसी छोरे के प्यार में दीवानी हो गई. बस यह समाचार सुन कर प्यार में दीवाने छोरे ने अपने को एक वृक्ष से लटका कर आत्महत्या कर ली.

हरियाणा में प्यार करने पर लड़की-लड़के का मारा जाना अब एक आम बात हो चुकी है. ऐसी हत्या को 'इज़्ज़त के नाम पर हत्या' या 'आनर किलिंग' कहते हैं. आप ने सुना होगा 'नाक का मामला'. जी हाँ, प्यार में डूबे बच्चे बच्चियां 'नाक' के कारण ही मारे जा रहे हैं. अब आप पूछेंगे कि यह 'नाक' का हत्या और प्यार से क्या लेना देना?

अरे भाई मध्यकालीन परंपरा में 'नाक' का जोड़ समाजिक सम्मान से हुआ करता था. अगर किसी परिवार में किसी ने अपने समाज की परंपरा तोड़ दी तो मानो उसने परिवार की 'नाक कटवा' दी....और किसी परिवार की 'नाक कट' जाने से बड़ा और कोई समाजिक अपमान सम्भव नहीं था. जिसकी 'नाक कटती थी' उसका 'हुक्का पानी' बंद... अर्थात उसका समाजिक बहिष्कार हो गया. अब समाज में वह तब ही सम्मानित हो सकता था जब वह अपमान का प्रायशचित कर ले.

सोनीपत में जो दो बच्चे प्यार की दीवानगी में मारे गए उन्होंने अपने गोत्र में प्रेम करने का समाजिक गुनाह किया. बस हरियाणा की खाप पंचायत के ज़रिए उन बच्चों के घरवालों को अपना 'हुक्का पानी' (समाजिक बहिष्कार) बंद होने का डर हो गया. इस से पहले की पंचायत 'हुका-पानी' बंद करती, भाई ने अपनी बहन की हत्या कर परिवार वालों की 'नाक' बचा ली.

प्यार दीवाना होता है

Image caption वर्जित गोत्र में शादी करने वाले बच्चों के परिवार को बहिष्कार झेलना पड़ता है

भगवान बचाए ऐसे 'हुक्का-पानी बंद होने' और 'नाक बचाने' जैसी मध्यकालीन परंपराओ से. अभी पिछले हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट ने इसी प्रकार की 'नाक बचाने' के लिए हत्या करने वालों को 'सज़ाए मौत' का हुक्म दिया था. हम समझे कि चलो इस मध्यकालीन परंपरा पर अब हरियाणा में रोक लगेगी. लेकिन सोनीपत में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के दस-बारह दिन बाद फिर 'नाक बचाने' के लिए एक भाई ने अपनी बहन की हत्या कर दी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हरियाणा में इन लोगों पर असर नहीं हुआ. पर प्यार की दीवानगी तो कभी रुकने वाली नहीं है, और हरियाणा में लोगो की 'नाक' भी कटना नहीं बंद होगी. क्या हरियाणा में प्यार करने वालो कि ऐसे ही हत्याएं होती रहेंगी?

भगवान के लिए अब हरियाणा में कुछ कीजिए और इस मध्यकालीन 'नाक और हुक्के पानी बंद करने कि परंपरा को समाप्त कीजिए!

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