कश्मीर में कर्मचारियों की हड़ताल बढ़ी

कश्मीर हड़ताल

भारत प्रशासित जम्मू और कश्मीर के चार लाख 50 हज़ार से अधिक जूनियर स्तर के कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल को इस महीने की 19 तारीख़ तक बढ़ाने की घोषणा की है.

पिछले सप्ताह कश्मीर में अनिवार्य सेवा प्रबंधन क़ानून 'एस्मा' लागू कर दिया गया है कि 'काम नहीं तो पैसा नहीं' फिर भी चार लाख 50 हज़ार से अधिक सरकारी कर्मचारी अपनी हड़ताल पर क़ायम हैं.

कश्मीरी राज्य सरकार ने 50 से अधिक कर्मचारी नेताओं को एस्मा का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है.

सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को नौकरी से बर्ख़ास्त करने की धमकी भी दे रखी है लेकिन फिर भी तीन अप्रैल से शुरु हुई इस हड़ताल पर कर्मचारी क़ायम हैं.

ये कर्मचारी छठे वेतन आयोग के तहत बक़ाया राशि की मांग कर रहे हैं. वे केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के बराबर हाउस रेंट भत्ते की भी मांग कर रहे हैं और साथ में सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ा कर 60 की जाए.

कर्मचारियों के एक नेता ने फ़ोन करके पत्रकारों को बताया,''हम लोग बीच में हड़ताल नहीं छोड़ सकते और उसने हड़ताल को आगे 19 तक जारी रखने की घोषणा की.''

सरकारी कर्मचारी यूनियन के नेता रामकुमार शर्मा ने कहा, "एस्मा लगा कर 50 से अधिक नेताओं की गिरफ़्तारी और नौकरी से बर्ख़ास्त करने की धमकी ने हमारे संकल्प में मज़बूती पैदा की है और हम अपने हक़ के लिए और अधिक उत्साह के साथ लड़ेंगे."

मेडिकल सेवाएं जारीं

Image caption हड़ताल के दौरान कर्मचारियों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई

राज्य के मेडिकल शिक्षा मंत्री राजेंद्र सिंह छिब ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राज्य के हर अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं जारी हैं और बाहर से आने वाले मरीज़ों को देखा जा रहा है.

उन्होंने कहा कि शुरू के दिनों में ओपीडी पर प्रभावित हुई थी लेकिन अब वह भी सामान्य ढंग से काम कर रहा है.

दूसरी ओर राज्य के मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कर्मचारियों से काम पर लौट आने की पुरज़ोर अपील की है.

जम्मू कश्मीर सरकार ने फ़रवरी 2009 में छठे वेतन आयोग लागू करने की मंज़ूरी दी थी और यह घोषणा की थी कि प्रभावी वेतन उन्हें जुलाई, 2009 से दिया जाएगा जबकि उसकी सिफ़ारिश पहली जनवरी, 2006 से लागू होगी.

बक़ाया राशि को पांच क़िस्तों में अदा किया जाना था और यह कर्मचारी के प्रॉविडेंट फ़ंड में जाना था.

इस हड़ताल के कारण सरकारी दफ़्तर, स्कूल, अस्पताल, न्यायालय और अन्य ज़रूरी सेवाएं प्रभावित हुई हैं.

वित्त विभाग के सूत्रों ने बताया है कि केंद्र सरकार ने पैसे जारी नहीं किए हैं जिससे कि छठे वेतनमान को लागू किया जा सके और बक़ाया अदा किया जा सके. बक़ाया रक़म अदा करने के लिए 4200 करोड़ रूपए की ज़रूरत है.

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