गोरूमारा बना देश का नंबर वन नेशनल पार्क

गुरुमारा में नृत्य
Image caption गोरूमारा में आने वाले पर्यटकों के सामने इलाक़े की महिलाएं नृत्य और गीत पेश करती हैं.

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी ज़िले में स्थित गोरूमारा देश का नंबर वन नेशनल पार्क बन गया है.

केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से दो साल पहले नेशनल पार्क के प्रबंधन की दक्षता के आकलन के लिए मैनेजमेंट इफेक्टिवनेस इवेल्यूएशन कमिटी का गठन किया गया था.

इस कमिटी ने देश के 180 नेशनल पार्कों की समीक्षा के बाद गोरूमारा को 84 अंक देते हुए पहले स्थान पर रखा है. कमिटी ने इसी सप्ताह समीक्षा के नतीजों का एलान किया है.

कमिटी के सदस्य डीएस श्रीवास्तव कहते हैं "यह समीक्षा मूल रूप से आठ बिंदुओं पर आधारित थी. कमिटी ने देश के सभी नेशनल पार्क प्रबंधन से जंगल से सटी बस्ती में रहने वाले लोगों के आर्थिक विकास के जरिए जंगल के बचाव और ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए गोरूमारा मॉडल अपनाने की सिफ़ारिश की है."

जीवन बदला

गोरूमारा नेशनल पार्क से सटी नौ बस्तियों के लगभग हज़ारों लोगों का जीवन अब पूरी तरह बदल गया है. पहले वे लोग जंगल में पेड़ काट कर अपनी रोजी-रोटी चलाते थे. लेकिन अब यह तमाम लोग पर्यटन के साथ जुड़ गए हैं.

नेशनल पार्क में आने वाले पर्यटकों को अपने नृत्य और गीत के ज़रिए मोहने वाले इन परिवारों को हर महीने लगभग पांच हज़ार की आय होती है. नतीजतन पेड़ों की कटाई पूरी तरह बंद हो गई है. इन लोगों की बदली जिंदगी ने ही गोरूमारा को देश में नंबर वन नेशनल पार्क बना दिया है.

जलपाईगुड़ी के डिवीजनल फारेस्ट आफ़िसर (वाइल्ड लाइफ) तापस दास कहते हैं "यह कामयाबी उन तमाम लोगों की है जो गोरूमारा से जुड़े हैं."

गोरूमारा इलाके की नौ में से आठ बस्तियों में पर्यटन केंद्रों की स्थापना की गई है. इन पर्यटन केंद्रों का प्रबंध स्थानीय लोगों के हाथों में है.

बस्ती के लोग नृत्य और गीत के जरिए यहां आने वाले पर्यटकों का मनोरंजन तो करते ही हैं, अपने हाथों से बनाई विभिन्न वस्तुएं भी उनको बेचते हैं.

Image caption पैसे आने की वजह से बस्ती के लोगों के रहन-सहन में सुधर आ रहा है

इन बस्तियों के युवकों को जंगल के गाइड के तौर पर प्रशिक्षण दिया गया है. वे पर्यटकों को जंगल की सैर कराते हैं. इस वजह से गोरूमारा में लकड़ी की चोरी और पशुओं का शिकार बंद हो गया है. अब इलाक़े के लोग ही जंगल को बचाने का काम कर रहे हैं.

गोरूमारा के रेंज आफ़िसर विमल देवनाथ बताते हैं, "इन बस्ती से रहने वाले लोगों ने बीते वित्त वर्ष के दौरान हस्तशिल्प सामग्री बेच कर लगभग छह लाख रुपए कमाए. इसी तरह नृत्य और गीत से जुड़े दल को पांच लाख और गाइड का काम करने वालों को सात लाख रुपए की आमदनी हुई."

पैसे आने की वजह से बस्ती के लोगों का रहन-सहन सुधर रहा है. पहले जहां वे बाहर से आने वाले लोगों को बिना दूध की चाय पिलाते थे, वहीं अब गरमागरम कॉफ़ी पेश कर रहे हैं.

सरकारी उपायों ने ही गोरूमारा को देश का सर्वश्रेष्ठ नेशनल पार्क बना दिया है. तेज़ी से कम होते जंगल को बचाने की दिशा में गोरूमारा की इस कामयाबी का जायज़ा लेने इसी महीने उड़ीसा का एक प्रतिनिधिमंडल भी गोरूमारा के दौरे पर आएगा.

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