समान गोत्र में शादी पर रोक लगे वरना आंदोलन: खाप

खाप पंचायत (फा़इल फो़टो)

खाप पंचायत ने समान गोत्र में शादी करने वालों के सामाजिक बहिष्कार का समर्थन किया

एक ही गोत्र में शादी करने वाले मनोज और बबली की हत्या से जुड़े अभियुक्तों को मौत की सज़ा मिलने से भड़की हरियाणा की सर्व खाप पंचायत ने चेतावनी दी है कि अगर एक महीने के भीतर समान गोत्र में शादी पर पाबंदी नहीं लगाई गई तो वो अपनी मांग को लेकर आंदोलन करेंगे.

तीस मार्च को हरियाणा में करनाल की एक अदालत ने खाप पंचायत के फ़ैसले के विरुद्ध शादी करने वाले मनोज और बबली की हत्या के मामले में पांच को मौत की सज़ा, एक दोषी को आजीवन कारावास जबकि एक को सात साल की सज़ा सुनाई थी.

अदालत के इस फ़ैसले के मद्देनज़र मंगलवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में विभिन्न खापों की महापंचायत हुई. इस बैठक में 15 से अधिक खाप पंचायतों के प्रतिनिधि शामिल थे.

इस बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि एक गोत्र में शादी वर्जित की परंपरा सही है और इसे क़ानूनी मान्यता मिलनी चाहिए, साथ ही एक गांव के रहने वाले लड़कों और लड़कियों के बीच भी शादी नहीं हो सकती.

उनका ये भी कहना था कि सर्व खाप पंचायत ने फ़ैसला किया है कि वो मनोज और बबली की हत्या के मामले में दोषियों की क़ानूनी मदद दी जाएगी.

'हिंदू विवाह कानून बदले'

खाप पंचायतों ने बैठक में मांग रखी की सरकार हिंदू विवाह अधिनियम में परिवर्तन लाए ताकि उनकी समाजिक परंपराओं के तहत समान गोत्र में शादी पर पाबंदी लगाई जा सके.

सरकार हिंदू विवाह अधिनियम में परिवर्तन लाए ताकि उनकी समाजिक परंपराओं के तहत समान गोत्र में शादी पर पाबंदी लगाई जा सके.

महापंचायत का फ़ैसला

खाप पंचायत के एक सदस्य ने सार्वजनिक रुप से करनाल की अदालत के फ़ैसले की निंदा की और कहा कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो उसके बाद जो स्थिति होगी उसकी ज़िम्मेदार सरकार पर होगी.

पंचायत ने घोषणा की कि वो अपनी मांग को लेकर दिल्ली-चंढ़ीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर घेरा डालेंगे.

ग़ौरतलब है कि मनोज और बबली ने वर्ष 2007 में खाप पंचायत के फ़ैसले के विरुद्ध शादी कर ली थी. लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही इज्ज़त के नाम पर इस जोड़ी की हत्या कर दी गई थी. लेकिन दो साल तक चले मुक़दमे के बाद इस हत्या से जुड़े लोगों को सज़ा दी गई.

अदालत के फ़ैसले से खाप पंचायतें नाराज़ थी. खाप पंचायत एक ही गोत्र में शादी करने वालों के सख़्त ख़िलाफ़ है और अक्सर ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ कड़े क़दम का समर्थन करती है.

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