'अंकल, हमारे स्कूलों को न उड़ाएँ'

ध्वस्त स्कूल

बिहार के दूर-दराज़ के गाँवों के कुछ छात्रों ने माओवादियों से अपील की है कि वे उनके स्कूलों को विस्फोट से न उड़ाएँ.

पिछले कुछ सालों में माओवादियों ने राज्य के 25 स्कूलों की इमारतों को नष्ट कर दिया है. इनमें से पाँच तो पिछले साल दिसंबर से अब तक ही नष्ट किए गए हैं.

बिहार के माओवाद प्रभावित एक ज़िले के विद्यार्थियों ने इन माओवादी विद्रोहियों से अपील कर इस तरह की घटनाओं को अंजाम न देने की गुज़ारिश की है.

शिक्षा से वंचित

छात्रों ने अपनी अपील में कहा है, ''माओवादी अंकल, हमारी क्या ग़लती है कि हमारे स्कूल नष्ट किए जा रहे हैं. ऐसा करने से हम शिक्षा से वंचित हो जाते हैं."

विद्यार्थियों ने आगे कहा है, ''आपको पुलिस से समस्या हो सकती है लेकिन हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आप हमारे स्कूलों को क्यों नष्ट कर रहे हैं.''

दिलचस्प है कि हाल में इसके बाद माओवादियों ने स्कूलों को निशाना बनाने के लिए छात्रों से माफ़ी मांगी है.

औरंगाबाद ज़िले के एक गाँव के निवासी संतू कुमार और उनकी बहन प्रियंका का स्कूल पिछले साल दिसंबर में विस्फोट में उड़ा दिया गया था. अब उन्हें दूसरे स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए रोज़ क़रीब 15 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है.

औरंगाबाद से फ़ोन पर हुई बातचीत में संतू ने बीबीसी को बताया, "हमारी पढ़ाई की परवाह कोई नहीं करता है. हमारी पढ़ाई की भरपाई कौन करेगा?"

वहीं रोहतास ज़िले के गाँव दुग्धा में कुछ छात्रों के माता-पिता ने जब माओवादियों को स्कूल को उड़ाने से रोकने की कोशिश की तो उन्होंने उन लोगों को उनके घरों में बंद कर दिया और डायनामाइट लगाकार स्कूल को उड़ा दिया.

क़ानून का राज

इन माता-पिता में से एक ने कहा, ''क्या करें? कोई रास्ता नहीं है. हम पूरी तरह से असहाय हैं. दूर-दराज़ के इन गाँवों में सरकारी क़ानून नहीं चलता है.''

राज्य के अधिकारियों के मुताबिक़ बिहार के कुल 38 में से 30 ज़िले माओवाद प्रभावित हैं. इनमें से 15 ज़िलों को अत्यधिक संवेदनशील माना गया है.

लेकिन राज्य सरकार का मानना है कि इस समस्या को केवल विकास से ही नियंत्रित किया जा सकता है, क़ानून-व्यवस्था के तौर पर नहीं.

Image caption माओवादियों ने स्कूलों को उड़ाने के लिए छात्रों ले माफ़ी मांगी है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं, ''हम माओवादियों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई कर रहे हैं लेकिन हमारा मानना है कि इससे ज्यादा यह सामाजिक-आर्थिक समस्या है, उसके बाद क़ानून और व्यवस्था की.''

छात्रों की अपील का माओवादियों पर असर तो ज़रूर हुआ है. उन्होंने अपनी कार्रवाई का स्पष्टीकरण देते हुए पर्चे बाँटे हैं.

इस पर्चे में माओवादियों ने कहा है, ''हम अपनी इस तरह की कार्रवाई जिससे छात्रों के सामने इस तरह की समस्या आई है, उसके लिए माफ़ी माँगते हैं. लेकिन हमें स्कूलों को निशाना बनाने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि हमारे ख़िलाफ़ अभियान के लिए सुरक्षा बल इन स्कूलों का उपयोग कर रहे थे.''

माओवादियों ने दावा किया है कि सरकार अगले कुछ महीनों में इन स्कूलों को सेना का शिविर बनाने पर विचार कर रही है.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी केएस द्विवेदी कहते हैं, ''उन्होंने माफ़ी माँगने के लिए पर्चे और पुस्तिकाएँ तो बंटवा दी हैं लेकिन यह वादा नहीं किया है कि वे आगे से स्कूलों को नुक़सान नहीं पहुँचाएँगे.''

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