पाक ने क़साब के प्रत्यर्पण की माँग रखी

रहमान मलिक
Image caption पाकिस्तान के अनुसार क़साब का बयान रिकॉर्ड करना उसकी न्यायिक प्रक्रिया के लिए ज़रूरी है

पाकिस्तान ने भारत से नवंबर 2008 में मुंबई हमलों के दौरान गिरफ़्तार किए गए बंदूधारी अजमल आमिर क़साब के प्रत्यर्पण की मांग की है.

पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त शरत सब्बरवाल और उनकी टीम के अन्य अधिकारियों से मुलाक़ात के बाद पत्रकारों को बताया, "हमारी न्यायिक प्रक्रिया के लिए अजमल क़साब का बयान ज़रूरी है और जो बयान उन्होंने भारतीय अधिकारियों को दिया है वह पाकिस्तान की अदालतों में इस्तेमाल नहीं हो सकता."

उन्होंने आगे कहा, "अजमल क़साब को पाकिस्तान के हवाले किया जाए या फिर उनका बयान रिकॉर्ड करने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों को अनुमति दी जाए."

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान आमिर अजमल क़साब की गिरफ़्तारी के लिए इंटरपोल का दरवाज़ा खटखटाया चुका है.

उधर भारत उसके बाद ये स्पष्ट कर चुका है कि अजमल क़साब को पाकिस्तान को नहीं सौंपा जाएगा. विदेश सचिव निरुपमा राव ने स्पष्ट किया है कि इसका कारण यह है कि क़साब पर भारत में मुक़दमा चल रहा है.

'हाफ़िज़ के बारे जानकारी अविश्वसनीय'

रहमान मलिक ने भारतीय उच्चायुक्त शरत सब्बरवाल और उनकी टीम को आश्वासन दिया कि पाकिस्तान ने जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगाया है और उसके ख़िलाफ़ शिकंजा कसा है.

उन्होंने कहा, "भारत ने हमें जो सूचना दी थीं, हमने उन्हीं के आधार पर जमात-उद-दावा की छह वेबसाईट्स, 16 बैंक खातों और 143 दफ़्तरों को बंद किया है."

जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद पर बात करते हुए गृह मंत्री रहमान मलिक ने कहा, "भारत ने उनके बारे में अविश्वसनीय जानकारी दी थी, जिस पर हम उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं कर सकते."

रहमान मलिक के मुताबिक पाकिस्तान ने भारतीय जानकारी पर 71 चरमपंथियों को गिरफ़्तार किया और 64 के विदेश जाने पर प्रतिबंध भी लगा दिया. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि भारत ने पाकिस्तान को अब तक 10 दस्तावेज़ सौंपे हैं और पाकिस्तान की ओर से उसमें से पाँच के बारे में जवाब पहले ही दिया जा चुका है.

'बातचीत ही विकल्प'

उधर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने मुल्तान में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि परमाणु शक्तियाँ होने के नाते भारत और पाकिस्तान को बातचीत से समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए.

उन्होंने कहा, "दोनों देशों के बीच बातचीत ही एक मात्र विकल्प है और बातचीत इस क्षेत्र की शांति के लिए बहुत ही ज़रूरी है."

ग़ौरतलब है कि दोनों देशों के अधिकारियों और नेताओं के बीच मुंबई हमलों के बाद मुलाकात तो हुई है लेकिन भारत ने समग्र बातचीत पर विराम लगा रखा है और उसकी शर्त है कि पहले पाकिस्तान मुंबई हमलों के संबंध में विश्वसनीय कार्रवाई करे, तभी समग्र वार्ता का कोई फ़ायदा हो सकता है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने भारतीय प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा, "मनमोहन सिंह व्यक्तिगत रूप से किसी हद तक समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर हैं और पाकिस्तान भी चाहता है कि भारत के साथ संबंध मज़बूत हों."

शाह महमूद क़ुरैशी ने आशा व्यक्त की कि एक दिन दोनों देश शांति प्रक्रिया फिर से शुरु करेंगे.

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