बुर्ज ख़लीफ़ा है गौरव का लक्ष्य

गौरव शर्मा
Image caption गौरव शर्मा अब तक मुंबई की अनेक ऊंची इमारतों पर चढ़ चुके हैं.

आम लोगों के लिए जहाँ एक-दो मंज़िली इमारत पर सीढ़ियों से भी चढ़ना मुश्किल होता है, वहीं भारतीय स्पाइडरमैन के नाम से मशहूर 27 वर्षीय गौरव शर्मा गगन चुंबी इमारतों पर मिनटों में चढ़ जाते हैं.

पिछले एक साल से मुंबई की ऊँची से ऊँची इमारतों पर मिनटों में चढ़ने वाले गौरव मानों इसे अपना जुनून बना चुके है. गिनीज़ वर्ल्ड बुक में अपना नाम दर्ज करने की ख़्वाहिश रखने वाले गौरव अपने इस करतब से दुनिया भर की ऊंची-ऊंची इमारतों पर चढ़ना चाहते हैं.

मुंबई पुलिस में मार्शल ट्रेनर रह चुके गौरव अपने शौक़ के बारे में कहते है, "बचपन से ही मुझे कुछ हटकर करने का शौक़ था और मुझे सुबह आठ से शाम आठ बजे की नौकरी करना बिल्कुल पसंद नहीं था. मैं कुछ ऐसा करना चाहता था जिससे लोगों को मेरा नाम और काम याद रहे. मेरे घर के पास श्रीपति टावर है जिसे मैं पता नहीं क्यों बचपन से ही बड़े ध्यान से देखा करता था. जब मैंने इमारतों पर चढ़ने का मन बनाया तो सबसे पहले इसी इमारत को चुना."

अपने इस करतब और इच्छा को पूर्ण करने के लिए गौरव को काफ़ी मेहनत करनी पड़ी.

वो कहते हैं, "जब भी मैं अपनी इस इच्छा के बारे में किसी से बात करता तो वो सबसे पहले मुझे देखता और मुझ पर हँसता था. श्रपति टावर के मालिक ने भी पहले यही किया और कहने लगे कि शायद तुम्हें पता नहीं है कि ये बिल्डिंग 45 माले की है."

मुश्किलों पर फ़तह

इन सब मुश्किलों के बावजूद गौरव ने हार नहीं मानी और अपनी मंज़िल को पाने का प्रयास जारी रखा.

गौरव ने मुंबई की अनेक ऊंची इमारतों पर कामयाबी के साथ चढाई की है. उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था इसलिए वे सिर्फ़ 12वीं कक्षा तक ही पढ़ पाए हैं, लेकिन गौरव की मानें, तो इन्हें इस बात का कभी अफ़सोस नहीं हुआ कि वे ऊंची शिक्षा नहीं ले पाए.

वे कहते है, "मैं सभी बच्चों के माँ-बाप से कहना चाहता हूँ कि अपने बच्चों को वो मत करने दें, जो वो बचपन से करना चाहता है बल्कि उसे वो करने दे जो वो बड़ा होकर बनना चाहता है."

26 नवंबर को मुंबई हमले के दौरान गौरव और उनके मंथन नामक संस्था के क़रीब तीन सौ स्वयंसेवियों ने लोगों की मदद की थी.

इस बारे में वो बताते हैं, "हम ओबेरॉय और ताज होटल पर शुरू से ही तैनात थे. एक बार हमने जोश में आकर अंदर जाने की भी कोशिश की लेकिन जवानों ने हमें रोक दिया. इस घटना के दो महीने बाद 26 जनवरी को हमले में मारे गए लोगो श्रद्धांजलि देने और मुंबई के लोगों का हौसला बढ़ने के लिए मैंने श्रीपति टावर चढ़ने की बात आगे बढ़ाई."

गौरव कहते हैं कि इनके लोगों को हमले के समय काम करते कुछ पुलिसवालों ने देखा था, इसलिए उन्हें श्रपति टावर पर की इजाज़त मिल गई. लेकिन बिल्डिंग पर चढ़ने से पहले उन्हें एक करार भी करना पड़ा जिसमें ये लिखा था कि अगर इस दौरान कुछ होता है तो उसके ज़िम्मेदार वे ही होंगे.

इस क़दर कठिन और ख़तरे से भरा काम करने पर भी गौरव के माँ-बाप ने उन्हें कभी किसी चीज़ के लिए नहीं रोका.

मदद करना का शौक़

Image caption गौरव के जुनून में उनके माता-पिता भी उनके साथी हैं.

माँ अंजू शर्मा को गौरव के इस काम से बहुत डर लगता है. वे कहती है, "बचपन से ही उसे अपनी जान की परवाह किए बना दूसरों की मदद करना अच्छा लगता है. मैंने इसे टीवी पर देखा है, लेकिन कभी उस जगह पर नहीं गई जहाँ ये अपनी मंजिल तय कर रहा होता है. मैं घर में रहकर भगवान से प्रार्थना करती हूँ कि भगवान मेरे बेटे की रक्षा करना."

गौरव के पिता श्रीनिवास शर्मा की राय भी कुछ अलग नहीं है. उनके अनुसार, "मैं वहाँ जाता हूँ लेकिन भीड़ से एकदम अलग खड़ा रहता हूं. अपने बेटे को अपनी मंजिल पर पहुंचते देखकर मैं बहुत गर्व महसूस करता हूँ."

फ़िलहाल गौरव आने वाले साल में भारत की कुछ नामचीन इमारतों पर अपना जलवा दिखाना चाहते हैं, जिसमें दिल्ली की हंसालय बिल्डिंग, कोलकाता की साउथ सिटी प्रोजेक्ट और बंगलोर की सुभाष चंद्र बोस बिल्डिंग शामिल है.

इतना ही नहीं दुबई में स्थित दुनिया की सबसे ऊँची इमारत बुर्ज ख़लीफ़ा पर चढ़ कर वे अपना नाम गिनीज़ वर्ल्ड बुक में लिखाना चाहते हैं.

इस समय गौरव के पास कोई स्थायी नौकरी नहीं है. अभी वे पर्सानिलिटी डेवेलपमेंट से लेकर पर्सनल बॉडी बिल्डिंग ट्रेनिंग देते हैं.

वो कहते हैं कि उनकी भी इच्छा है कि परिवार के लिए कुछ किया जाए और मुंबई में अच्छा घर हो. लेकिन ये सब वे अपनी मेहनत से करना चाहता हैं.

संबंधित समाचार