इलाहाबाद में बना 'किसान रोबोट'

रोबो किसान और डॉक्टर अंशुका
Image caption किसान रोबो का अभी व्यावसायिक इस्तेमाल होना बाक़ी है

रोबोट के क़िस्से हम आप सब ने बहुत सुने हैं, कभी वो सुपर हीरो की तरह मानव सभ्यता को बचाते नज़र आते हैं तो कभी उन कामों को आसान करते नज़र आते हैं जो इंसानों के लिए करना मुश्किल होता है, पर क्या हम सब ने कभी कल्पना की है कि अगर एक रोबोट किसानों के काम करने लगे तो उसे क्या कहेंगे: जी हाँ 'रोबो किसान.'

इलाहाबाद के एक संस्थान में एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर अंशुका ने एक ऐसा रोबोट बनाया है जो अंगूर के खेत में जा कर सिर्फ़ पौधों को देखकर उनका रोग बता देगा.

सोलर बैटरी से चलने वाला यह रोबोट चार छोटे छोटे पहियों के सहारे चलने वाली एक भुजा के रूप में दिखाई देता है जिसमे आँख और दिमाग़ किसी इंसानी चेहरे में स्थापित न करके रोबो आर्म (भुजा) के पास ही स्थापित किया गया है.

डॉक्टर अंशुका कहती हैं कि रोबोट को मनचाही शक्ल देना सिर्फ़ उसके निश्चित व्यावसायिक इस्तेमाल पर निर्भर करता है.

वो कहती हैं, "रोबोट का ढांचा इस खोज में कोई ख़ास मायने नहीं रखता, असल बात है रोबोट का कृत्रिम दिमाग़, जो कि रोग को उपचार की नौबत आने से पहले ही दूर करने में मदद करता है."

'रोबो किसान' की बनावट के बारे में अंशुका कहती हैं कि यह इस पर निर्भर करेगा कि किस तरह की ज़मीन पर इसका प्रयोगहोना है और इसका बजट क्या है. यानि अलग अलग जगहों पर अलग अलग शक्लों में दिखाई देगा रोबो किसान.

किसान बनेप्रेरणा

शहर में पली बढी अंशुका को बचपन से खेत और किसान दोनों ही आकर्षित करते थे. इसी बात ने उन्हें बैचलर ऑफ़ टेक्नॉलोजी एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया. इंजीनियरिंग की पढाई के दौरान एक संगोष्ठी में एक किसान ने उनसे जिज्ञासावश पूछा कि क्या ऐसा नहीं हो सकता कि वे खेत में कुछ देर आराम कर लें और कोई दूसरा उनका काम कर आए.

उस किसान की बात ने अंशुका को प्रेरित किया कि वो कुछ ऐसा करें जिससे भारत के किसानों को लाभ हो. उच्च शिक्षा के लिए उन्हें जापान सरकार की ओर से रोबोटिक्स में शोध करने के लिए छात्रवृति मिली, जहाँ रोबोट को दिए जाने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी रोबोट के दिमाग़ पर उन्होंने शोध किया और रोबो किसान के दिमाग़ को तैयार किया.

सेंसर और कैमरे का संगम

अंगूर के पेड़ के चुनाव की बात भी काफ़ी दिलचस्प है. अंशुका बताती हैं, "अंगूर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उगाया जाने वाला फल है, इसकी खेती दुनिया के अधिकतर देशों में की जाती है".

Image caption अंशुका अब अंगूर के अलावा गन्ने, आलू और टमाटर में होने वाली बीमारियों पर शोध करना चाहती हैं.

उनका कहना है, "इस रोबो किसान में एक सेंसर लगा हुआ है जिसमें अंगूर में होने वाली बीमारी (डाउनीमाइल्डियू) के आंकड़ों का विश्लेषण है. इस रोबोट में तीन कैमरे लगे हैं दो इसके बीच वाले हिस्से में हैं जो रोबोट को रास्ता देखने में मदद करते हैं तीसरा कैमरा इसके उपरी हिस्से में लगा है, जो पौधों के चित्र को इसमें लगे सेंसर तक भेजता हैं जहाँ वह उनका विश्लेषण कर यह बता देता है कि पौधे में कोई रोग है या नहीं."

पौधे में अगर बीमारी होती है तो रोबोट का सेंसर यह आंकड़ा किसान के कंप्यूटर पर भेजता है. रोबोट रास्ते में बाधा आने पर रास्ता बदल कर वापस अपने रास्ते पर आ जाता है.

अंशुका अब गन्ने, आलू, टमाटर में होने वाली बीमारियों पर शोध करना चाहती हैं जिससे रोबो किसान का फ़ायदा सही मायने में भारत के किसानों को मिले. इसके पेटेंट के लिए अंशुका ने आवेदन कर रखा है. पेटेंट मिलने के बाद ही वे इसके व्यवसायिक इस्तेमाल के बारें में सोचेंगी.

अंशुका ये याद दिलाना नहीं भूलतीं कि रोबो किसान के इस्तेमाल से खेती में कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगेगी और कीटनाशकों का वहीं इस्तेमाल होगा जहाँ उनकी ज़रुरत होगी.

हिंदी फ़िल्मों की शौक़ीन अंशुका कहती हैं कि खेती में भी नए प्रयोग होने चाहिए क्योंकि "हम हैं नए अंदाज़ क्यों हो पुराना."

संबंधित समाचार