कुंभ को गिनीज बुक में लाने की कोशिश

हरिद्वार महाकुंभ में बुधवार को आख़िरी स्नान हो रहा है और इसके साथ ही सदी का पहला महाकुंभ समाप्त हो जाएगा.

कई वजहों से ये महाकुंभ अपने आप में अनूठा और ऐतिहासिक रहा.

केंद्र सरकार ने इसे गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में शामिल करने का प्रस्ताव किया है.

बैसाख पूर्णिमा के अवसर पर लाखों की संख्या में लोग हर की पौड़ी पर उमड़ रहे हैं

चौदह अप्रैल को हुई भगदड़ और हादसे को देखते हुए असाधारण सुरक्षा व्सवस्था की गई है.

महाकुंभ का मुख्य आकर्षण अखाड़ों का शाही स्नान माना जाता है.

इस कुंभ की कुछ यादगार बातें रहीं. इस बार तीन की बजाए चार शाही स्नान हुए और पहली बार उदासी और बैरागी अखाड़ों ने भी शाही स्नान किया.

लगभग पहली बार ही अखाड़ों में स्नान को लेकर कोई विवाद भी नहीं देखने को मिला और सभी 13 अखाड़ों ने आम सहमति और क्रम से स्नान किया.

ऐतिहासिक कुंभ

महाकुंभ 14 जनवरी को शुरू हो गया था.

मुख्य मेला अधिकारी आनंद वर्धन दावा करते हैं, “इन साढ़े तीन महीनों में छह करोड़ लोगों ने स्नान किया जो कि अनुमान से कहीं बहुत ज्यादा है. इस दौरान क़रीब 30 हजार लोग बिछड़े भी लेकिन उन्हें परिजनों से मिलवा दिया गया और कुल मिलाकर ये आयोजन शांतिपूर्ण रहा.”

बड़ी संख्या में विदेशी भी शामिल हुए न सिर्फ सैलानी के तौर पर बल्कि कुछ महामंडलेश्वर भी बने जैसे कि ऑस्ट्रेलिया के स्वामी जसराजपुरी.

उनका कहना है, “हिंदू धर्म ने उनकी चेतना के नये द्वार खोले हैं और महाकुंभ जैसे अवसर पर संतों के दर्शन करके वो खुद को धन्य मानते हैं.”

महंत ज्ञानदास का कहना है,“ये सनातन धर्म के बड़प्पन औऱ उदार भाव का भी प्रतीक है.”

पुण्य और मोक्ष की कामना के लिए आम श्रद्धालुओं के अलावा बड़ी संख्या में मंत्री, संतरी और प्रीति जिंटा और विवेक ओबरॉय जैसे फिल्मी सितारों का जलवा भी देखने को मिला.

छत्तीसगढ़ की तो पूरी सरकार ही एक विशेष विमान से यहाँ पहुँची.

लेकिन जिस त्याग, तप, ज्ञान और संन्यास के लिए कुंभ की ये परंपरा प्रचलित हुई थी उसमें व्यापक बदलाव देखने को मिले और साधु-संत न सिर्फ़ हाईटेक मोबाइल और लैपटॉप से लैस नजर आए बल्कि उनमें से कई की आलीशान गाड़ी, सुरक्षा गार्ड और भव्य सिंहासन चर्चा का केंद्र बने रहे.

ऐसे ही एक साधु के वाहन से टकराकर दो लोगों की मृत्यु के बाद मची भगदड़ में सात लोग तीसरे शाही स्नान के दिन मारे भी गए.

जहां तक उत्तराखंड की सरकार की बात है वो अपने आयोजन और व्यवस्था से इतनी अभिभूत है कि मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अपनी पीठ थपथपाते हुए कुंभ के लिए नोबेल पुरस्कार का दावा कर दिया.

अपने चर्चित बयान में उन्होंने कहा, "अगर अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा को नोबेल मिल सकता है तो कुंभ को क्यों नहीं"?

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