सार्क में जलवायु परिवर्तन अहम मुद्दा

भूटान सार्क सम्मेलन
Image caption भूटान के प्रधान मंत्री का कहना है कि धरती अब और लोगों को पालने की क्षमता नहीं रखती.

दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (सार्क) सम्मेलन का आयोजन पहली बार भूटान में हो रहा है. हिमालय की गोद में बसे इस देश के लिए जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा मुद्दा है और इस बार के शिखर बैठक में इसी मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.

शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर समझौता भी होने वाला है.

भूटान के प्रधान मंत्री जिंग्मे थिनले का कहना है कि धरती अब और लोगों को पालने की क्षमता नहीं रखती, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाना है तो जल्द क़दम उठाने पड़ेंगे.

उधर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत ने एक कोष की घोषणा की है.

मनमोहन की प्रसन्नता

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "दक्षिण एशिया में भारत की ओर से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक कोष की घोषणा करते मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है. मैं इस क्षेत्र में कुछ ऐसे केंद्रों की स्थापना का सुझाव देना चाहूंगा जहां ऊर्जा तकनीकों का विकास किया जा सके."

इस शिखर बैठक में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की छाया साफ़ नज़र आई. इसका अंदाज़ा इस बात से लगता है कि भूटान के प्रधान मंत्री जिंग्मे थिनले को कहना पड़ा की बातचीत से ही समस्याएं हल होती हैं और पड़ोसियों के झगड़े क्षेत्र के विकास पर असर डालते हैं. उनका इशारा साफ़ तौर पर भारत की ओर था.

जिंग्मे थिनले ने कहा, "हर दक्षिण एशियाई ये जानता है कि बंटे हुए परिवार कभी खुश नहीं रहते. अगर पड़ोसियों के बीच आपसी मतभेद और विवाद क़ायम रहते हैं तो समृद्धि नहीं आ सकती."

पर मालदीव के युवा राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद सीधी सपाट बात करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने बिना लाग लपेट के सीधे सीधे भारत पाकिस्तान का नाम लेकर सार्क के मूल उद्देश्य की ओर ध्यान आकृष्ट करवाने की कोशिश की.

उनका कहना था सार्क की नींव मनमुटाव नहीं सहयोग पर टिकी है और भारत पाकिस्तान इस पर ध्यान दें.

'मनमुटाव ख़त्म हो'

मोहम्मद नशीद ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि पड़ोसी देश आपसी मनमुटाव को ख़त्म करने के रास्ते तलाश सकते हैं. मैं ये बात ख़ासतौर पर भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में कर रहा हूं. सार्क चार्टर हमें यही बताता है कि आपसी सहयोग से हम एक दूसरे से बातचीत कर मतभेद दूर करें."

इस्लाम के नाम को आतंकवाद से जोड़ने पर बंगलादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने चिंता व्यक्त की और आतंकवाद के ख़िलाफ़ सहयोग पर ज़ोर दिया.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सैयद यूसु़फ़ राज़ा गिलानी ने आतंकवाद को बड़ा ख़तरा बताया और खुद को इसका शिकार.

गिलानी ने कहा,"आतंकवाद एक ऐसी जीज़ है जो कि स्थानीय से लेकर वैश्विक स्तर तक लोगों को प्रभावित करती है. इसकी जड़ें इतिहास में निहित हैं जहां अन्याय और आर्थिक असमानता से इसे बढ़ावा मिला है. इससे निपटने के लिए हमें एक दूसरे का सहयोग करना होगा."

उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस्लामाबाद में गृह मंत्रियों की बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा होगी.

ग़ौर करने की बात ये है कि भारत के प्रधान मंत्री ने न तो आतंकवाद की चर्चा की न पाकिस्तान की. शायद गुरुवार को अपनी द्विपक्षीय बातचीत के लिए उन्होंने इस विषय को छोड़ रखा है. लेकिन सार्क के अन्य देश इन दो बड़े पड़ोसी देशों के मनमुटाव की छाया से तंग नज़र आते दिख रहे हैं.

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