गोली-बारूद के साथ छह जवान गिरफ़्तार

सीआरपीएफ़ के जवान
Image caption गिरफ़्तार किए गए सीआरपीएफ़ के दो जवानों को बर्खास्त कर दिया गया है

उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष कार्यदल (एसटीएफ़) ने एक दर्जन से अधिक ज़िलों में विभिन्न स्थानों पर छापा मारकर चोरी के गोली-बारूद के साथ पुलिस और अर्धसैनिक बलों के छह जवानों को गिरफ़्तार किया है.

इनमें से दो जवान अर्ध सैनिक बल केंद्रीय पुलिस रिज़र्व फ़ोर्स (सीआरपीएफ़) के 62 वीं बटालियन के हैं.

अधिकारियों का कहना है कि इनके पास से विभिन्न राइफ़लों की गोलियों के अलावा बड़ी मात्रा में गोलियों के खाली खोखे भी मिले हैं.

पुलिस को संदेह है कि ये लोग माओवादियों या नक्सलवादियों, चरमपंथियों और माफ़िया अपराधियों को गोली-बारूद सप्लाई करते थे.

अभी कई जगह छापे की कार्रवाई चल रही है.

कार्रवाई

एसटीएफ़ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) बृजलाल के अनुसार बस्तर के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में 76 जवानों के मारे जाने के बाद सूचना मिली थी कि उन्हें इलाहाबाद के रास्ते गोली-बारूद की सप्लाई की जाती है.

इन सूचनाओं के आधार पर गुरुवार से प्रदेश के दर्जन भर से अधिक ज़िलों में छापे की कार्रवाई शुरु की गई थी. इनमें बस्ती, गोरखपुर, झाँसी, मुरादाबाद और रामपुर शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई के दौरान इंसास, 303 बोर, एके 47 सहित कई बंदूकों और 9एमएम पिस्टल की क़रीब पाँच हज़ार जीवित कारतूस बरामद किए गए हैं.

इसके अलावा अलग-अलग कारतूस के 245 किलो खोखे और कुछ मैग्ज़ीन्स बरामद किए गए हैं.

Image caption नक्सली सुरक्षाबलों से लूटे हुए हथियारों का भी उपयोग करते हैं

एडीजी बृजलाल ने बताया कि इन ख़ोखों में बारूद भरकर इन्हें फिर से काम में लाया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि जिन छह जवानों को गिरफ़्तार किया गया है, उनमें से दो सीआरपीएफ़ के 62वीं बटालियन के हैं. यह वही बटालियन है जिसके जवान छह अप्रैल को बस्तर के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में मारे गए थे.

ये दोनों जवान रामपुर में तैनात थे. इनके नाम दिनेश सिंह और विनोद पासवान बताए गए हैं.

एक सेवानिवृत दरोगा यशोदा नंद सिंह को गिरफ़्तार किया गया है जो पुराने आर्मरर रह चुके हैं.

इसके अलावा मुरादाबाद पुलिस अक़ादमी में तैनात नाथीराम सैनी और झाँसी पीएसी में तैनात अखिलेश पांडे और बैंसला लाल को गिरफ़्तार किया गया है.

किसके लिए?

पुलिस का कहना है कि गोली-बारूद की चोरी के लिए फ़ायरिंग रेंज में कम गोलियाँ चलाकर अधिक दर्ज कर ली जाती थीं और खाली खोखे दिखा दिए जाते थे.

अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में गोलियों की चोरी किसी एक व्यक्ति को बेचने के लिए नहीं की जा सकती.

उनका कहना है कि या तो इन गोलियों को किसी चरमपंथी संगठ न को बेचा जाता था या फिर नक्सलियों को.

एडीजी बृजलाल का कहना है कि इन जवानों से पूछताछ की जा रही है और संभावना है कि जल्दी ही इन सभी बातों की जानकारी मिल सकेगी.

उन्होंने बताया कि इस बीच गिरफ़्तार किए गए लोगों से मिली जानकारी के आधार पर बनारस, चंदौली, मिर्ज़ापुर, इलाहाबाद, कानपुर, बस्ती और गोरखपुर आदि ज़िलों में छापे की कार्रवाई चल रही है.

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