कसाब के हिसाब किताब की घड़ी

कसाब

मुंबई पर 26 नवंबर, 2008 को हुए हमले एक मात्र जीवित हमलावर अभियुक्त मोहम्मद अजमल कसाब का फ़ैसला सोमवार को विशेष अदालत सुनाएगी.

कसाब पर भारत के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने,166 लोगों की हत्या में शामिल होने समेत 86 आरोप तय किए गए हैं.

कसाब और मारे गए उसके नौ सहयोगियों पर लश्करे तैबा के इशारे पर 166 लोगों की हत्या और 304 को घायल करने का आरोप है.

इस हमले में 25 विदेशी भी मारे गए थे.

पाकिस्तान के नागरिक कसाब के अलावा दो भारतीयों, फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद पर भी हमले की साजिश रचने का आरोप है.

भारतीय नागरिकों पर आरोप है कि उन्होंने निशाना बने स्थानों का नक्शा तैयार कर उन्हें लश्करे तैबा को सौंपा था.

तेज़ कार्यवाही

भारत में आतंकवाद के मामले में ये अब की सबसे तेज़ अदालती कार्यवाही मानी जा रही है.

कसाब के मामल में विशेष अदालत के जज एमएल तहलियानी सोमवार को फ़ैसला सुनाएंगे.

पुलिस ने लगभग 11 हज़ार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की और 658 लोगों को गवाही के रूप में पेश किया.

इस मामले की सुनवाई आठ मई को शुरू हुई थी.

इसके लिए आर्थर रोड जेल में एक विशेष अदालत बनाई गई जिसमें 658 गवाहों के बयान दर्ज हुए.

न्यायाधीश एमएल तहिलयानी की अदालत में 30 गवाहों ने कसाब को उस शख्स के रूप में पहचाना जिसने उन पर गोली चलाई थी.

कड़ी सुरक्षा

Image caption मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है

भारतीय कानून के इतिहास में पहली बार एफ़बीआई के अधिकारियों ने तकनीकी सबूत दिए कि चरमपंथियों ने ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम की मदद ली थी.

अभियोजन पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज भी सबूत के रूप में पेश किए जिनमें चरमपंथियों को बंदूकें लेकर घूमते और लोगों पर गोलीबारी करते दिखाया गया.

ये तस्वीरें छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन, ताज महल होटल और ओबेराय होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों से ली गईं थीं.

इधर फ़ैसले के मद्देनज़र आर्थर रोड़ जेल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

उल्लेखनीय है कि कसाब के मामले में कई उतार चढ़ाव आए और उनके कई वकील भी बदले गए.

पहले अंजलि वाघमारे उनकी वकील बनीं और उसके बाद अब्बास काज़मी ने ये ज़िम्मेदारी संभाली लेकिन दोनों ने विवादों के बाद ज़िम्मेदारी छोड़ दी.

हालांकि वरिष्ठ वकील माजिद मैमन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि सुनवाई निष्पक्ष माहौल में हुई और मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों में जो बदलाव हुए, उनका फ़ैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

कसाब को जो भी सज़ा होती है, वो उसके ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं यानी ये मामला अभी ख़त्म नहीं हुआ है.

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