अजमेर और हैदराबाद के तार जुड़े?

मक्का मस्जिद
Image caption मक्का मस्जिद के विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी

अजमेर की दरगाह में हुए बम विस्फोट के संबंध में देवेंद्र गुप्ता और दो अन्य व्यक्तियों की गिरफ़्तारी के बाद अब हैदरबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद विस्फोट की छानबीन में एक नई जान पड़ गई है.

हैदराबाद की घटना की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच ब्यूरो का एक दल डीजी अशोक तिवारी के नेतृत्व में जयपुर पहुंचा है जो देवेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर और विष्णुपति से पूछताछ करेगा.

सीबीआई के सूत्रों ने बताया है की वे राजस्थान पुलिस की इस सूचना के बाद वहाँ गए है कि देवेंद्र गुप्ता ने उनके सामने ये स्वीकार कर लिया है कि मक्का मस्जिद और अजमेर की दरगाह में विस्फोटों के तार आपस में जुड़े हैं.

इसके अलावा इस बात ने भी सीबीआई का ध्यान आकर्षित किया है कि इन दोनों घटनाओं में काफ़ी समानताएँ हैं.

समानताएं

हैदराबाद का विस्फोट 18 मई 2007 को हुआ और अजमेर का विस्फोट 11 अक्तूबर 2007 को हुआ और इन दोनों ही घटनाओं में बम विस्फोट के लिए मोबाइल फ़ोन को एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया.

दोनों ही स्थानों पर दो-दो बम रखे गए और उनमें से केवल एक ही फट सका था.

अजमेर में जो बम नहीं फट सका उससे मिलने वाले सिम कार्ड की मदद से राजस्थान पुलिस देवेंद्र गुप्ता तक पहुंच सकी.

गुप्ता की पहचान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक कार्यकर्ता के रूप में की गई.

सूत्रों के अनुसार उसने राजस्थान पुलिस के सामने इस बात को स्वीकार किया है कि हैदराबाद और अजमेर के विस्फोटों में जो सिम कार्ड इस्तेमाल किए गए वह उन 11 कार्डों में थे जो उसने झारखण्ड में बाबूलाल यादव के नाम से नक़ली दस्तावेज़ के ज़रिए ख़रीदे थे. जिस तरह के बम और विस्फोटक इन दोनों घटनाओं में उपयोग किए गए वे भी एक जैसे थे.

मालेगाँव

Image caption अजमेर विस्फोट संदिग्ध की गिरफ़्तारी से कई राज़ खुलने की आशा

इस प्रकार सीबीआई के सूत्रों के अनुसार अब ये निश्चित होता जा रहा है कि न केवल इन दोनों घटनाओं में हिन्दू चरमपंथियों का हाथ हो सकता है बल्कि उनका संबंध मालेगाँव के विस्फोट के अभियुक्तों प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित और अन्य लोगों से भी हो सकता है.

इस तरह एक बार फिर अभिनव भारत संगठन पर बार सीबीआई का ध्यान केंद्रित है. सीबीआई का एक और दल गत सप्ताह नासिक गया था जहाँ उसने मालेगाँव विस्फोट के अभियुक्तों से एक बार फिर पूछताछ की.

हालाँकि राजस्थान पुलिस या सीबीआई के अधिकारियों ने मक्का मस्जिद विस्फोट के बारे में कोई बात औपचारिक रूप से नहीं कही है लेकिन राजस्थान के गृह मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने मीडिया से कहा है कि देवेंद्र गुप्ता से पूछताछ पूरी हो जाने के बाद कई बड़े राज़ खुलने वाले हैं.

राजस्थान पुलिस अभी कुछ और बड़े लोगों को ढूंढ रही है.

सीबीआई के सूत्रों ने कहा है की देवेंद्र गुप्ता को जल्द ही पर हैदराबाद लाया जाएगा और उससे यहाँ भी पूछताछ की जाएगी.

यहाँ ये बात उल्लेखनीय है कि 18 मई 2007 को मक्का मस्जिद में जुमे की नमाज़ के बाद हुए बम विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और जब उत्तेजित मुसलमानों की भीड़ बाहर निकली तो पुलिस की फ़ायरिंग में नौ और लोग मारे गए.

घटना के तुरंत बाद हैदराबाद पुलिस के अधिकारियों ने इस घटना की ज़िम्मेवारी लश्करे-तैबा और हरकतुल जिहाद-ए-इस्लामी जैसे संगठनों पर डाल दिया और कहा कि उन्हें एक लापता चरमपंथी शाहिद बिलाल पर संदेह है.

बाद में आंध्र प्रदेश सरकार ने इस केस की जांच सीबीआई के हवाले कर दी लेकिन गत डेढ़ वर्ष से यह जांच ठंडे बस्ते में पड़ी थी.

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदांबरम ने कहा था कि पाकिस्तान में शाहिद बिलाल के मारे जाने के बाद इस केस के तमाम सुराग़ ठंडे पड़ गए हैं इसलिए यह जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है.

संबंधित समाचार