कसाब पर फ़ैसला आज

कसाब
Image caption सरकारी वकीन ने कसाब को लोगों की मारने की मशीन बताया.

मुंबई हमले के मामले में एकमात्र जीवित पकड़े गए चरमपंथी अजमल आमिर कसाब को विशेष अदालत गुरुवार को सज़ा सुनाएगी.

कसाब पर 86 आरोप लगाए गए थे और उन्हें सभी मामलों में दोषी पाया गया था. दोषी साबित किए जाने के बाद कसाब की सज़ा पर बहस हुई.

बहस के दौरान सरकारी वकील ने कसाब के लिए फांसी की सज़ा की मांग की जबकि बचाव पक्ष ने कम से कम सज़ा के लिए अपील की.

बहस सुनने के बाद न्यायाधीश एम तहिलयानी ने कहा था कि कसाब को गुरुवार को सज़ा सुनाई जाएगी.

सज़ा पर बहस के दौरान ज़्यादातर वक्त कसाब आँखें मूंदे सर झुकाकर बैठे रहे.

न्यायालय में रखी अपनी दलीलों के बारे में पत्रकारों को जानकारी देते हुए निकम ने कहा कि कसाब और उनके साथियों ने जिन लोगों को मारा, उसमें कई धर्मों के लोग शामिल थे.

उज्जवल निकम ने कहा कि उन्होंने न्यायाधीश को बताया कि कसाब और उनके साथी अबू इस्माइल ने छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन, कामा अस्पताल, जुहू चौपाटी जैसी जगहों में गोलियाँ चलाईं जिसमें 72 लोगों की जानें गई. इसमें 14 पुलिस अफ़सर शामिल थे.

निकम ने कसाब को 'लोगों की मारने की ऐसी मशीन' बताया जिसे बनाने वाले पाकिस्तान में हैं.

उन्होंने अजमल कसाब के बारे में कहा, “वो आज सर नीचे करके बैठा है. ये उसका असली चेहरा नहीं है. कसाब एक ऐसा शख्स है जिसे इंसान कहना भी मुश्किल है. जब कसाब और अबू इस्माइल रेलवे स्टेशन पहुँचे तो वहाँ कम भीड़ देखकर उन्हें दुख हुआ. इसका मतलब था कि वो ज़्यादा लोगों को मारना चाहते थे.”

बचाव

उधर कसाब का बचाव करते हुए उनके वकील केपी पवार ने कहा कि कसाब को फांसी की सज़ा नहीं दी जानी चाहिए.

पवार ने कहा कि कसाब को चरमपंथी संगठनों ने कश्मीर और गोधरा में मुसलमानों की हालत के बारे में सीडी दिखाई. उन्हें देखने के कारण कसाब के दिमाग़ में हिंसा की बात आना स्वाभाविक है.

पवार ने कहा कि कसाब की उम्र कम है, उन पर चरमपंथी संगठनों का दबाव है.

उन्होंने कहा कि कसाब को सुधारने और उसके पुनर्वास की अब भी गुंजाइश है.

उल्लेखनीय है कि अदालत ने सोमवार को कसाब को सभी मामलों में दोषी ठहराया था.

संबंधित समाचार